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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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Blog posts : "General"

मन के मत पे मत करियो..... (व्यंग्य)

कलियुगी बाबा लोग प्रवचन ठेलते हैं कि मन बावरा है। सारे सांसारिक गलत कामों के लिए मन ही उकसाता है। बुजुर्ग लोग हर चीज में नकारात्मक सलाह देते हैं। ये मत करो। वो मत करो। यहाँ मत जाओ। वहाँ मत जाओ। मनमानी मत करो। इस महान भारतभूमि पर एसे बहुत से खलिहर महानुभाव वास करते हैं, जो आपको ‘मन’ और ‘मत’ पर घंटो प…

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मन के मत पे मत करियो..... (व्यंग्य)

कलियुगी बाबा लोग प्रवचन ठेलते हैं कि मन बावरा है। सारे सांसारिक गलत कामों के लिए मन ही उकसाता है। बुजुर्ग लोग हर चीज में नकारात्मक सलाह देते हैं। ये मत करो। वो मत करो। यहाँ मत जाओ। वहाँ मत जाओ। मनमानी मत करो। इस महान भारतभूमि पर एसे बहुत से खलिहर महानुभाव वास करते हैं, जो आपको ‘मन’ और ‘मत’ पर घंटो प…

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फिर से इलेक्शन आ रहे है।

फिर से.........
इलेक्शन आ रहे हैं।

जिन अछूतों को कभी,
मानव नहीं समझा गया।
कुम्भ में उन भंगियों के, 
पाँव धोये जा रहे हैं। …

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निंदा है, तो जिंदा है... (व्यंग्य)

        निन्दा रस का मजा सोमरस से भी ज्यादा आता है। यह एक सर्व सुलभ, सर्व ब्यापी, महंगाई से परे, सर्व ग्राही चीज है। निन्दा का आविष्कार हमारे देश में कब हुआ, यह तो परम निंदनीय ब्यक्ति ही बता सकता है। लेकिन आजकल इसका प्रयोग हमारे परम आदरणीय लोग खूब कर रहे हैं।…

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आँकड़ों पर रार..., पब्लिक बेरोजगार ! (व्यंग्य)

आजकल जिसे देखो जनता को रोजगार देने के लिए दुखी हुआ पड़ा है। खुद भले नौकरीशुदा हो, लेकिन बेरोजगारों की चिंता उसे खाये जा रही है। चिंता करना भी आजकल फैशन हो गया है। और यह फैशन चुनावों के समय कुछ ज्यादा ही महामारी का रूप ले लेता है। नेता लोग, जनता की तरह-तरह की चिंताओं में खुद को डुबो लेते है। किसी को ज…

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कैसे हम गणतन्त्र मनायें?????

कैसे हम गणतन्त्र मनायें? कैसे हम गणतन्त्र मनायें?

संविधान की, लाज नहीं है
गांधी,नेहरू, आज नहीं हैं
जनता का भी, राज नहीं है…

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सोच बदलो, देश बदलेगा .... (व्यंग्य)

सर्दी के इस चिलचिलाते मौसम में भी आजकल देश में बदलाव की लू चल रही है। जब से मोदी जी ने कहा है, सोच बदलो, देश बदलेगा। तब से शायद ही कोई इस बदलाव की चपेट में आने से बचा हो। क्या जनता, क्या नेता, क्या डाक्टर, क्या मरीज, क्या अमीर, क्या गरीब, सब बदलाव से ग्रसित हैं। बदलाव भी एक तरह का नहीं, तरह तरह का। …

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... और रावण जल गया।

मुझे सबसे ज्यादा डर धार्मिक लोगों से लगता है। सभी धार्मिक लोगों से नहीं , बल्कि जो किसी श्री श्री . . . पूजा समिति का सदस्य हो। पूजा समिति के लोगों से मुझे उतना ही डर लगता है, जितना कि कांग्रेस को अन्ना हज़ारे से। भाजपा को किए गए चुनावी वादों से। अकबर को मी टू अभियान से। जनता को चुनाव से। देश को देश …

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हाथों में क्या है? (व्यंग्य)

हाथ हमारे शरीर का सबसे उपयोगी और सबसे उपेक्षित अंग है। जैसे भारत में दलितों की हालत है, वैसे ही शरीर में हाथ की हालत होती है। पैदा होने से लेकर मरने तक हर जगह हाथ का काम होता है, लेकिन आदमी आता भी खाली हाथ है और जाता भी खाली हाथ है। आदमी जीवन में हाथों का तरह तरह के उपयोग करके, उम्र बिता देता है, फि…

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(व्यंग्य) महानता हमारा, जन्मसिद्ध अधिकार है....

आजकल हमारा देश महान हो गया है। चार साल पहले तक महान नहीं था, नहीं तो मेरे जैसे फालतू लोग, अदने लोग कैसे पैदा हो पाते? यह बात तो हमारे प्रधान सेवक भी विदेशों में जाकर कन्फ़र्म कर चुके हैं कि उनके प्रधानसेवक बनने से पहले, देशवासियों को, खुद को भारतीय कहने में शर्म महसूस होती थी। लेकिन आजकल मेरा भारत मह…

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चन्द चेहरे जो तमतमाए हैं....

चन्द चेहरे जो, तमतमाए हैं।
आइने शाह को, दिखाये हैं।        (1)

साजिशें देखना, हवाओं की,
आंधियों में, दिये जलाए हैं।          (2)…

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बढ़िया है... भई...बढ़िया है...

बढ़िया है... भई...बढ़िया है...

तेरे नेता देश लूटते, देश भक्त बस मेरे नेता,
सबके अपने चश्मे हैं, सबका अलग नजरिया है। 
बढ़िया है...भई... …

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डरना जरूरी है...... !!! (व्यंग्य)

             जिस तरह देश की रक्षा में, मरना जरूरी है। काम करो या ना करो, काम का दिखावा करना जरूरी है। अच्छे दिन लाने के लिए, अपनी जेबें भरना जरूरी है। ईमानदार होने के लिए, भ्रष्टाचार करना जरूरी है। ठीक वैसे ही देश के विकास के लिए, जनता-मीडिया-संस्थानो का, सरकार से डरना जरूरी है। हमारे देश की जनता, व…

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तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...
हम रामराज्य ले आएँगे, हमपे केवल एतबार करो
तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

तुम भोली- भाली जनता हो, भारत में तुम्हारा खाता …

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समस्या हैप्पी न्यू ईयर की .... (ब्यंग)

जब-जब नया साल आता है, मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जाती है। बात ही इतनी खतरनाक है। हैपी न्यू ईयर आता है और जेब को तरह-तरह से सैड कर जाता है। वैसे नया साल हो या साली, जेब पर दोनों ही भारी पड़ते हैं। नया साल केवल जेब ही नही काटता, बल्कि ढेर सारी परेशानियाँ भी बांटता है।…

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. . . हैप्पी न्यू ईयर !! 2018

देश की मंहगाई से बेहाल देशवासियो को नये साल की बधाई। नये वेतन आयोग से खुशहाल सरकारी बाबुओं को हैप्पी न्यू  ईयर। आजकल सभी लोग न्यू ईयर के हैप्पी होने की कामना कर रहे हैं। पुराने साल में हैप्पी न्यू ईयर के बाद तो सब सैड सैड ही रहा। कभी  तेल के दाम ने बदहजमी की,  तो कभी गैस (के दामों) ने पेट खराब किया।…

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करेक्टर वाली गाय.......

गरीबी से परेशान,
था एक किसान।
न पैसे, न बेंचने को,
था कोई सामान।

दो गायें थी उसकी,
कुल जमा पूंजी।
इनके सिवा संपत्ति,

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समस्या, एक ‘राष्ट्रीय समस्या’ की ! (व्यंग्य)

एकाएक हमारा राष्ट्र जैसे बिलकुल अनाथ सा हो गया है। ना कोई माँ, ना बाप, ना भाई, ना बहन। ना कोई खुशी, ना गम। ना कोई काम, ना आराम। हिंदुओं- मुसलमानों- सिक्खों- ईसाइयों की भीड़ में बिलकुल अकेला। ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों और शूद्रों से खचाखच भरे होने के बाद भी एक-एक भारतीय के लिए तरसता, बिल्कुल तनहा…

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टेक्निकल लोचा....... (व्यंग्य)

हमारे देश में तरह तरह के लोचे होते रहते हैं। कभी केमिकल लोचा हो जाता है तो कभी टेक्निकल लोचा। राजनीतिक और धार्मिक लोचे तो आए दिन होते ही रहते हैं। वैसे लोचा करने को लुच्चई कहते हैं कि नहीं ये नहीं पता। लेकिन इतना जरूर पता है कि लोचा और लुच्चई एक दूसरे के सगे-सम्बन्धी जरूर हैं और दोनों हमारे देश में …

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हर कीमत पर जो बिकने को...

हर कीमत पर जो बिकने को, बैठे हैं बाजारों में।  
भ्रस्टाचार वो ढूंढ रहे हैं, औरों के किरदारों में। 

जिनको  हम समझे

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20 Blog Posts

आपकी राय

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आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...