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हम भारतीयों में एक खास किस्म की अंतरराष्ट्रीय आत्मा पायी जाती है। हम अमेरिका की स्वास्थ्य नीति, फ्रांस के किसान आंदोलन, इजराइल-गाजा संघर्ष, यूक्रेन-रूस युद्ध, और यहां तक कि अफ्रीका के जंगलों में मर रहे गैंडे तक पर इतनी गहराई से चर्चा कर लेते हैं, कि CNN और BBC वाले भी जल-भुन जाते … |
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Blog posts : "satire"
ग्लोबल ज्ञान का देसी ठेकेदार
लीक तंत्र का लोकतंत्र
हमारे किसी महापुरुष ने कहा था कि हमारा देश, लोकतंत्र की जननी है। लेकिन आजकल हमारा प्यारा देश लीक- तंत्र का पप्पा बना हुआ है। देश में हर तरफ खटाखट- खटाखट पेपर लीक हो रहे हैं। पेपर लीक में हम लोग दुनिया में नंबर वन बन गए हैं। हमारे पप्पा युद्ध भले ही रुकवा लें, लेकिन एक भी पेपर लीक नहीं रोक …
लीक तंत्र का लोकतंत्र (व्यंग्य)
हमारे किसी महापुरुष ने कहा था कि हमारा देश, लोकतंत्र की जननी है। लेकिन आजकल हमारा प्यारा देश लीक- तंत्र का पप्पा बना हुआ है। देश में हर तरफ खटाखट- खटाखट पेपर लीक हो रहे हैं। पेपर लीक में हम लोग दुनिया में नंबर वन बन गए हैं। हमारे पप्पा युद्ध भले ही रुकवा लें, लेकिन एक भी पेपर लीक नहीं रोक पा रहे। हम…
अबकी बार ! बस कर यार !
जब से घोषित हुआ है चुनाव। वोटरों के बढ़ गए हैं भाव। वोटरों के लिए हर दिन त्योहार है। चारों ओर नारों की बौछार है। अबकी बार, फलां सरकार। अबकी बार, फलां सौ पार। बहुत हुआ बेरोजगारी की मार, अबकी बार फलाने की सरकार। बहुत हुआ महंगाई की मार, अबकी बार फला पार्टी की सरकार। ये सब सुन-सुन कर मैं हो गया था लाचार…
अबकी बार ! बस कर यार ! (व्यंग्य)
जब से घोषित हुआ है चुनाव। वोटरों के बढ़ गए हैं भाव। वोटरों के लिए हर दिन त्योहार है। चारों ओर नारों की बौछार है। अबकी बार, फलां सरकार। अबकी बार, फलां सौ पार। बहुत हुआ बेरोजगारी की मार, अबकी बार फलाने की सरकार। बहुत हुआ महंगाई की मार, अबकी बार फला पार्टी की सरकार। ये सब सुन-सुन कर मैं हो गया था लाचार…
जोगीरा सा रा रा रा रा … (होली स्पेशल) - 2024
निकल रही है महंगाई से, फाग में मुंह से झाग
डीजल गैस के दाम ने देखो, पकड़ लिया है आग
जोगीरा सा रा रा रा रा …
बेगारी सुरसा के मुंह सी, बढ़े यहां दिनरात,
पेंशन और बुढ़ाई की तो, खड़ी हो गई खाट
जोगीरा सा रा रा रा रा …
एनपीए के नाम पे अरबों, लोन माफ हो जाय।
पांच किलो चावल बांटे तो, वो रेवड़ी कहलाय…
जोगीरा सा रा रा रा रा … (होली स्पेशल) - 2024
निकल रही है महंगाई से, फाग में मुंह से झाग
डीजल गैस के दाम ने देखो, पकड़ लिया है आग
जोगीरा सा रा रा रा रा …
बेगारी सुरसा के मुंह सी, बढ़े यहां दिनरात,
पेंशन और बुढ़ाई की तो, खड़ी हो गई खाट
जोगीरा सा रा रा रा रा …
एनपीए के नाम पे अरबों, लोन माफ हो जाय।
पांच किलो चावल बांटे तो, वो रेवड़ी कहलाय…
बुरा न मानो...
होली में, बुरा न मानने की बोली, दिल में गोली की तरह लगती है। 'बुरा न मानो', हमारे देश में सदियों से चली आ रही बड़ी प्यारी धमकी है कि 'भइया, हम तो तुम्हारे साथ बुरा करेंगे, लेकिन तुम बुरा मत मानना’। यानी, मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे। आजकल तो यह हालत हो गयी है कि अगर सरकार की किसी भी बात का बुरा …
बुरा न मानो...
होली में, बुरा न मानने की बोली, दिल में गोली की तरह लगती है। 'बुरा न मानो', हमारे देश में सदियों से चली आ रही बड़ी प्यारी धमकी है कि 'भइया, हम तो तुम्हारे साथ बुरा करेंगे, लेकिन तुम बुरा मत मानना’। यानी, मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे। आजकल तो यह हालत हो गयी है कि अगर सरकार की किसी भी बात का बुरा …
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती...
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्व…
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती...
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्व…
गुनहगार भी तुम्हीं..
मुंसिफ भी हो तुम्ही, और गुनहगार भी तुम्हीं।
तुम ही हो कार्पोरेट, और सरकार भी तुम्हीं।
जनता को कौन राह, दिखाएगा आजकल,
तुम ही तो हो मशाल, अन्धकार भी तुम्हीं।
नफरत हो, फेक न्यूज़ हो, मुद्दों को दबाना,
मीडिया हो चौथा खंभा,अखबार भी तुम्ही।
कितना भी पाप, जुल्म बढ़े, राज मे…
गुनहगार भी तुम्हीं..
मुंसिफ भी हो तुम्ही, और गुनहगार भी तुम्हीं।
तुम ही हो कार्पोरेट, और सरकार भी तुम्हीं।
जनता को कौन राह, दिखाएगा आजकल,
तुम ही तो हो मशाल, अन्धकार भी तुम्हीं।
नफरत हो, फेक न्यूज़ हो, मुद्दों को दबाना,
मीडिया हो चौथा खंभा,अखबार भी तुम्ही।
कितना भी पाप, जुल्म बढ़े, राज मे…
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
फिर ......
इलेक्शन आ रहे हैं…
जिन अछूतों को कभी,
मानव नहीं समझा गया।
कुम्भ में उन भंगियों के,
पाँव धोये जा रहे हैं।
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
जो दलित-शोषित रहे हैं,
जाति से भी, धर्म से भी,
वोट की खातिर वो अब,
हिन्दू बनाये जा रहे हैं।
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
भूंख, बेगारी कोई मुद्द…
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती।
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्वास्…
इन सम कोउ ज्ञानी जग नाहीं !! (व्यंग्य)
यूँ तो हम भारतवासी, सदियों से विश्वगुरु रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में हमारी विशेषज्ञता में चार चाँद लग गए है। अब तो हाल ये है कि हमें हर महीने, कभी-कभी तो हर हफ्ते, विशेषज्ञता के दौरे पड़ने लगे हैं। हालत यह हो गई है कि जब तक दो चार लोगों पर ज्ञान की बौछार न कर ली जाये, पेट साफ ही नहीं होता। हमारे …
डरना जरूरी है...... !!! (व्यंग्य)
जिस तरह देश की रक्षा में, मरना जरूरी है। काम करो या ना करो, काम का दिखावा करना जरूरी है। अच्छे दिन लाने के लिए, अपनी जेबें भरना जरूरी है। ईमानदार होने के लिए, भ्रष्टाचार करना जरूरी है। ठीक वैसे ही देश के विकास के लिए, जनता-मीडिया-संस्थानो का, सरकार से डरना जरूरी है। हमारे देश की जनता, व…
आपकी राय
फटाफट पेपर लीक हो रहे हैं और झटपट लोगों तक पहुंच जा रहे हैं खटाखट जनप्रति निधि माला माल हो रहे हैं निश्चित ही विश्व गुरू बनने से भारत को कोई माई का लाल रोक नहीं सकता।
Very nice 👍👍
Jabardast
Kya baat hai manoj Ji very nice mind blogging
Keep your moral always up
बहुत सुंदर है अभिव्यक्ति और कटाक्ष
अति सुंदर
व्यंग के माध्यम से बेहतरीन विश्लेषण!
Amazing article 👌👌
व्यंग का अभिप्राय बहुत ही मारक है। पढ़कर अनेक संदर्भ एक एक कर खुलने लगते हैं। बधाई जानी साहब....
Excellent analogy of the current state of affairs
#सत्यात्मक व #सत्यसार दर्शन
एकदम कटु सत्य लिखा है सर।
अति उत्तम🙏🙏
शानदार एवं सटीक
Niraj
अति उत्तम जानी जी।
बहुत ही सुंदर रचना रची आपने।
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