Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

मेरे बारे में

मनोज जानी 
जन्म: 7 जुलाई 1976 को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले की शाहगंज तहशील में स्थित भैंसौली गाँव में।
(i) मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट आफ टेकनालोजी, इलाहाबाद से इलेक्ट्रिकल में बी.ई.।
(ii) इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालोजी, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी, वाराणसी से Control System में एम टेक।
(iii) इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से M.B.A. (Finance)। 
लेखन: 1995 में सबसे पहले ‘तीसरी आँख’ पाक्षिक पत्रिका से विशेष संवाददाता के रूप में जुड़े। जिसमें ब्यंग्य का एक कालम ‘सलाम साब !’ सन 2000 तक लिखते रहे। इसी दौरान 1998 से ‘युवराज फीचर सर्विस’ व ‘उर्वशी फीचर सर्विस’ दिल्ली से जुड़े, जिसके द्वारा बहुत से ब्यंग्य और सामयिक लेख देश की बहुत सी पत्र पत्रिकाओं में छपते रहे हैं।
ब्यंग्य, सामयिक लेख और कहानियाँ “सरिता”, “सरस सलिल”, ‘पंजाब केसरी’ (जालंधर), ‘उत्तम हिन्दू’ (पंजाब), दैनिक ‘अरुण प्रभा’ (अलवर), ‘विकास बुलेटिन’ (कपूरथला), दैनिक ‘उत्तर उजाला’ नैनीताल, दैनिक हमारा महानगर, मुम्बई, दैनिक समज्ञा, कोलकाता, साप्ताहिक ‘सेकुलर भारत’ (दिल्ली), ‘दिल्ली सहारा’, ‘कलम की जंग’ (दिल्ली), ‘आब्जर्बर’ (धनबाद), ‘सजग राष्ट्रीय समाचार’ (दिल्ली), ‘शहर की आवाज’ (मुंबई), साप्ताहिक ‘सलाम दिल्ली’, ‘वीर प्रताप’ (जालंधर), ‘जन प्रवाह’ (ग्वालियर), ‘जंगे भारत मेल’ (दिल्ली), ‘प्रात: कमल’ (मुजफ्फर पुर), ‘नई दुनिया’ (भोपाल), ‘हिन्द जनपद’ (सोलन), साप्ताहिक ‘भरत पुत्र’ (दिल्ली), ‘राष्ट्रीय विज्ञान टाइम्स’ (दिल्ली), साप्ताहिक ‘राष्ट्रीय नवोदय’ (दिल्ली), मासिक ‘रहस्य माया’ (लखनऊ), आदि में प्रकाशित होते रहते हैं। 

प्रकाशित पुस्तकें:
  (1) चिकोटी, (ब्यंग्य संग्रह), राधा/नमन  प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से 2013 में प्रकाशित।
  (2) आईने के सामने, (काव्य संग्रह),  राधा/नमन  प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से
2014 में  प्रकाशित।
 (3) ठिठोली,  (ब्यंग्य संग्रह), राधा/नमन  प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से 2015 में प्रकाशित।
 
सम्मान / पुरस्कार :
‘चिकोटी’ ब्यंग्य संग्रह के लिए 2013 का ‘शरद जोशी सम्मान’ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा। 
संपर्क: 9818451208 (केवल whatsapp), e-mail: mkjohny@live.in; mkjohnynhpc@gmail.com
website : www.manojjohny.com 
Mobile: +975- 17877822 and +975-77429212

 

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9

हमसे संपर्क करें

visitor

263523

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...