जब से घोषित हुआ है चुनाव। वोटरों के बढ़ गए हैं भाव। वोटरों के लिए हर दिन त्योहार है। चारों ओर नारों की बौछार है। अबकी बार, फलां सरकार। अबकी बार, फलां सौ पार। बहुत हुआ बेरोजगारी की मार, अबकी बार फलाने की सरकार। बहुत हुआ महंगाई की मार, अबकी बार फला पार्टी की सरकार। ये सब सुन-सुन कर मैं हो गया था लाचार…
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Blog posts : "poem"
अबकी बार ! बस कर यार ! (व्यंग्य)
जब से घोषित हुआ है चुनाव। वोटरों के बढ़ गए हैं भाव। वोटरों के लिए हर दिन त्योहार है। चारों ओर नारों की बौछार है। अबकी बार, फलां सरकार। अबकी बार, फलां सौ पार। बहुत हुआ बेरोजगारी की मार, अबकी बार फलाने की सरकार। बहुत हुआ महंगाई की मार, अबकी बार फला पार्टी की सरकार। ये सब सुन-सुन कर मैं हो गया था लाचार…
जोगीरा सा रा रा रा रा … (होली स्पेशल) - 2024
निकल रही है महंगाई से, फाग में मुंह से झाग
डीजल गैस के दाम ने देखो, पकड़ लिया है आग
जोगीरा सा रा रा रा रा …
बेगारी सुरसा के मुंह सी, बढ़े यहां दिनरात,
पेंशन और बुढ़ाई की तो, खड़ी हो गई खाट
जोगीरा सा रा रा रा रा …
एनपीए के नाम पे अरबों, लोन माफ हो जाय।
पांच किलो चावल बांटे तो, वो रेवड़ी कहलाय…
जोगीरा सा रा रा रा रा … (होली स्पेशल) - 2024
निकल रही है महंगाई से, फाग में मुंह से झाग
डीजल गैस के दाम ने देखो, पकड़ लिया है आग
जोगीरा सा रा रा रा रा …
बेगारी सुरसा के मुंह सी, बढ़े यहां दिनरात,
पेंशन और बुढ़ाई की तो, खड़ी हो गई खाट
जोगीरा सा रा रा रा रा …
एनपीए के नाम पे अरबों, लोन माफ हो जाय।
पांच किलो चावल बांटे तो, वो रेवड़ी कहलाय…
बुरा न मानो...
होली में, बुरा न मानने की बोली, दिल में गोली की तरह लगती है। 'बुरा न मानो', हमारे देश में सदियों से चली आ रही बड़ी प्यारी धमकी है कि 'भइया, हम तो तुम्हारे साथ बुरा करेंगे, लेकिन तुम बुरा मत मानना’। यानी, मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे। आजकल तो यह हालत हो गयी है कि अगर सरकार की किसी भी बात का बुरा …
बुरा न मानो...
होली में, बुरा न मानने की बोली, दिल में गोली की तरह लगती है। 'बुरा न मानो', हमारे देश में सदियों से चली आ रही बड़ी प्यारी धमकी है कि 'भइया, हम तो तुम्हारे साथ बुरा करेंगे, लेकिन तुम बुरा मत मानना’। यानी, मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे। आजकल तो यह हालत हो गयी है कि अगर सरकार की किसी भी बात का बुरा …
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती...
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्व…
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती...
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्व…
गुनहगार भी तुम्हीं..
मुंसिफ भी हो तुम्ही, और गुनहगार भी तुम्हीं।
तुम ही हो कार्पोरेट, और सरकार भी तुम्हीं।
जनता को कौन राह, दिखाएगा आजकल,
तुम ही तो हो मशाल, अन्धकार भी तुम्हीं।
नफरत हो, फेक न्यूज़ हो, मुद्दों को दबाना,
मीडिया हो चौथा खंभा,अखबार भी तुम्ही।
कितना भी पाप, जुल्म बढ़े, राज मे…
गुनहगार भी तुम्हीं..
मुंसिफ भी हो तुम्ही, और गुनहगार भी तुम्हीं।
तुम ही हो कार्पोरेट, और सरकार भी तुम्हीं।
जनता को कौन राह, दिखाएगा आजकल,
तुम ही तो हो मशाल, अन्धकार भी तुम्हीं।
नफरत हो, फेक न्यूज़ हो, मुद्दों को दबाना,
मीडिया हो चौथा खंभा,अखबार भी तुम्ही।
कितना भी पाप, जुल्म बढ़े, राज मे…
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
फिर ......
इलेक्शन आ रहे हैं…
जिन अछूतों को कभी,
मानव नहीं समझा गया।
कुम्भ में उन भंगियों के,
पाँव धोये जा रहे हैं।
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
जो दलित-शोषित रहे हैं,
जाति से भी, धर्म से भी,
वोट की खातिर वो अब,
हिन्दू बनाये जा रहे हैं।
फिर इलेक्शन आ रहे हैं…
भूंख, बेगारी कोई मुद्द…
कौन मरेगा, फिक्स है............
जला पसीना ईंट पकाया,
छेनी से भगवान बनाया।
मन्दिर मस्जिद बन जाने पर,
जो अंदर भी ना जा पाया।
किसके छूने पर भगवन को,
बहुत छूत का रिस्क है।
कौन दलाली से उनकी,
जेब भरेगा फिक्स है।
बहा पसीना अन्न उगाया
भले कभी भरपेट न खाया
और मंडियों में जब पहुंचा,
सही दाम जो कभी न प…
अब तो जाग ससुर के नाती...
अब तो जाग ससुर के नाती।
निकला सूरज, रात है भागी।
अब तो जाग, ससुर के नाती।
पांच किलो गेहूं चावल की,
तुम मरते हो लाइन में।
व्यापारी-नेता पीते हैं,
खून तुम्हारा, वाइन में।
ले उधार, मेहमान पिए घी,
कर्जदार सब भए घराती।
अब तो जाग ससुर के नाती।
महंगी शिक्षा, स्वास्…
अपना संविधान है.... (संविधान दिवस पर )
अपना संविधान है....
सबको गरिमा से जीने का,
हक देता संविधान है।
वर्ण-लिंग या जाति-धर्म सब,
उसके लिए समान है।
वैज्ञानिक चेतना बढ़ाए,
मानवता समझाए।
समता,स्वतंत्रता,अभिव्यक्ती
और बंधुता लाए।
रोके, सबको आडंबर से,
शोषण से मजदूरों को।
भेदभाव ना, मिले बराबर
न्याय सभी मजबूरों को।
संव…
अपना संविधान है.... (संविधान दिवस पर )
अपना संविधान है....
सबको गरिमा से जीने का,
हक देता संविधान है।
वर्ण-लिंग या जाति-धर्म सब,
उसके लिए समान है।
वैज्ञानिक चेतना बढ़ाए,
मानवता समझाए।
समता,स्वतंत्रता,अभिव्यक्ती
और बंधुता लाए।
रोके, सबको आडंबर से,
शोषण से मजदूरों को।
भेदभाव ना, मिले बराबर
न्याय सभी मजबूरों को।
संव…
आपकी राय
फटाफट पेपर लीक हो रहे हैं और झटपट लोगों तक पहुंच जा रहे हैं खटाखट जनप्रति निधि माला माल हो रहे हैं निश्चित ही विश्व गुरू बनने से भारत को कोई माई का लाल रोक नहीं सकता।
Very nice 👍👍
Jabardast
Kya baat hai manoj Ji very nice mind blogging
Keep your moral always up
बहुत सुंदर है अभिव्यक्ति और कटाक्ष
अति सुंदर
व्यंग के माध्यम से बेहतरीन विश्लेषण!
Amazing article 👌👌
व्यंग का अभिप्राय बहुत ही मारक है। पढ़कर अनेक संदर्भ एक एक कर खुलने लगते हैं। बधाई जानी साहब....
Excellent analogy of the current state of affairs
#सत्यात्मक व #सत्यसार दर्शन
एकदम कटु सत्य लिखा है सर।
अति उत्तम🙏🙏
शानदार एवं सटीक
Niraj
अति उत्तम जानी जी।
बहुत ही सुंदर रचना रची आपने।
हमसे संपर्क करें
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