मनोज जानी डाट काम पर आपका स्वागत है:

प्रतिदिन हमारे चारो तरफ बहुत सी घटनाये  होती हैं, जो हमारे मन को, विचारों को झकझोर  देती हैं। इन घटनाओं पर हम सबके विचार  अलग अलग तरह से प्रदर्शित होते हैं। कोई  कविता कहता है तो कोई गजल। कोई ब्यंग  लिखता है तो कोई कालम। अपने इन्ही विचारों को कहने तथा आपके विचारों को जानने का  माध्यम है यह वेबसाइट... आप अपनी प्रतिक्रिया और टिप्पणियाँ / कमेन्ट, हर मुद्दे पर जरूर लिखे। तभी आपका और मेरा संवाद पूरा होगा। 

सामयिक

क्या कहें साहब !!

Posted May 10, 2012

हम अपने देश के हालात ! क्या कहें साहब !!

दिल में जलते हुये जज़्बात! क्या कहें साहब !!

 

इतने सालों की, जम्हूरियत का, हासिल क्या?

झूठे वादों की है सौगात ! क्या कहें साहब !!…

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जताते नहीं हैं लोग

Posted April 25, 2012

दिल में है किसके क्या? ये जताते नहीं हैं लोग !

होंठों  पे दिल की बात भी,  लाते नहीं हैं लोग !

 

खुद कुछ ना करें, सबकुछ भगवान से चाहें,

सिर सामने यूं ही तो, झुकाते नहीं हैं लोग !!…

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बस तेरे आने से

Posted April 24, 2012

है बहुत दुशवार जीना, घर  के वीराने से,

जिंदगी  आबाद होती,  बस तेरे आने से !!

 

बस तुम्हारी ही खुशी है, इस जहां में बेहिसाब ,

नापकर, गम दूर करता, शाकी  पैमाने  से !!…

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... क्या देंगे ?

Posted April 23, 2012

हम अपने प्यार का, उनको हिसाब क्या देंगे !

सवाल ही जो गलत है,  जवाब  क्या  देंगे !

 

पिलाते हैं जो खुशी, नाप के पैमानों   से,

वो भला हमको खुशी, बेहिसाब क्या देंगे ?…

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हार की समीक्षा !!!!

Posted April 21, 2012

चुनाव खत्म हो गए। जीतने वाले तो राज कर रहे हैं, हारने वाले हार की समीक्षा। वैसे भी जब से हारे हैं, नेता जी मीडिया से भी दूर दूर ही रहते हैं। पता नहीं कब कौन हार का कारण पूँछने लगे। इसलिए हार के काफी दिनों बाद नेताजी बाहर निकले हैं। हार की समीक्षा करने के लिए। आनन फानन सभी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की बैठक बुला ली। ब्रेन स्टार्मिंग शुरू हुई। सभी उपस्थित छोटे बड़े नेताओं ने अपना अपना अनुभव और…

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बात से परहेज, चिट्ठी में तेज...

Posted April 3, 2012

गधे की लात का, पाकिस्तान की बात का, ज़िंदगी के साथ का, आई एस आई के हाथ का, क्या भरोसा? धोबी ने पीछे से डंडा मारा, गधे की लात शुरु। अमेरिका ने पाकिस्तान को फटकारा, उसकी भारत से बात शुरु।  भारत में किसी नेता को छींक भी आई, तो खुफिया विभाग कहे कि, इसमें संलिप्त है आईएसआई। अब कहने को क्या हैं? जिसकी जो इच्छा हो कहे। आखिर लोकतन्त्र है । चुप क्यों रहे ? अगर समय चुनाव का हो, तो कहने सुनने की…

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अरमान बहुत है....

Posted March 26, 2012

नेता बनूँ मैं देश का, अरमान बहुत है।

पर क्या करूँ मैं दिल मेँ, ईमान बहुत है।

 

संसद हो या तिहाड़, कोई फर्क नहीं ज्यादा

चोरों, लुटेरों का यहाँ, सम्मान बहुत है। …

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बुरा ना मानो होली है- नेताओं संग होली

Posted March 8, 2012

मनमोहन सिंह : मनमोहन की मोहनी, करे ना ज्यादा बात। बेकारी और उदारीकरण की चिंता है दिन रात । चिंता है दिन रात, भरेगा कैसे खजाना । सोनिया की मर्जी पर जाने, किस दिन पड़ जायेगा जाना। अर्थनीति के तेज खिलाडी, राजनीति में फ़िसड्डी। राजा, ममता और कलमाड़ी, बने गले की हड्डी। मुखिया बने देश के लेकिन, सोनिया की ही सुने सलाह। राजग वाले कहें शिखण्ड़ी, मगर भरे ये कभी न आह। भरें कभी ना आह, सहें…

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सबसे ज्यादा वो लूटेगा.........

Posted February 19, 2012

हम भी लूटें, तुम भी लूटो, लूटने की आजादी है।

सबसे ज्यादा वो लूटेगा, जिसके तन पर खादी है।

 

मंदिर-मस्जिद में उलझाओ, आरक्षण के वादे दो,

याद ना कर पाये जनता, मुद्दा जो बुनियादी है। …

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घर वो बना नहीं सकता.....

Posted February 18, 2012

शहर में आजकल, घर वो, बना नहीं सकता।

इधर-उधर से जो, ’ऊपरी’ कमा नहीं सकता।

      कार्डों,  गिफ़्टों के दौर में,  सिर्फ  दिल से

      बना तो सकता है रिश्ते, निभा नहीं सकता …

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जिस दिल पे हमको नाज था...

Posted February 18, 2012

जिस दिल पे हमको नाज था, ये दिल वही रहा।

अब  ये  भले, जमाने के, काबिल  नहीं रहा।

 

कुछ  तो  जमाने  का भी है, कसूर इश्क में,

दिल को ही दे कसूर जो, वो गालिब नहीं रहा।

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शुरुआत कीजिये.....

Posted February 17, 2012

माहौल खुश बनाने की,  शुरुआत  कीजिये ।

हंस करके हरेक शख्स से, बस बात कीजिये

 

उलझन में ना रहो कि, क्या सही है क्या गलत?

बस आँख मुंद- करके, दिल का,  साथ दीजिये ।

 

यूं …

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बटला काण्ड पर रोईं सोनिया

Posted February 16, 2012
बटला पे रोई सोनिया, ये एहसान बहुत है।

       शायद चुनाव क्षेत्र में, मुसलमान बहुत हैं।

 

                  बरसों पुराने जख्म, चुनावों में कुरेदो

                  भावनात्मक मुद्दों में, ज…

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प्रशासनिक सुधार !!

Posted February 15, 2012

यूँ तो हमारा देश बहुत सी बातों में पूरी दुनिया का नेता रहा हैं। जैसे गरीबी में सबसे आगे। कामचोरी या घुसखोरी, में  सबमें अब्वल  ही रहा हैं। इधर एक सर्वेक्षण में हमारे प्रशासनिक अधिकारी, पूरे एशिया में सबसे अधिक निकम्मे हैं, यह बताया गया हैं। हमारे प्रशासनिक अधिकारी, बहुत ही उम्दा किस्म के निकम्मे और भ्रष्ट  बताए गए हैं। हमें नाज हैं एसे महान प्रशासकों पर। …

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वेलेन्टाइन डे चूक ना जाये !!

Posted February 10, 2012

जब से इस देश ने उधारीकरण के साथ आंखें चार किया है, बहुत से रस्मो-रिवाज भी भारत को उधार के साथ फ्री में मिले हैं। बिल्कुल एक के साथ एक फ्री की स्टाइल में। हमारा देश सभी चीजों में पीछे भले हो, लेकिन क्या मजाल कि दिखावे में किसी से पीछे हो। चाहे जितना जोर लगा लो, सबसे आगे होंगें हिन्दुस्तानी। …

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