Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

मनोज जानी॰ काम


मनोज जानी ड़ाट काम पर  आपका स्वागत है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में घट रही घटनाएँ उसे कुछ ना कुछ सोचने को विवश करती रहती हैं। हर मुद्दे पर सभी अपनी राय अलग अलग तरह से ब्यक्त करते हैं। कोई भाषण देता है, कोई कविता या गजल कहता है, कोई ब्यंग्य या कालम लिखता है। यह वेबसाइट भी अपने विचार ब्यक्त करने और आप लोगों से संवाद का एक माध्यम है। लेकिन बिना आपकी राय के यह संवाद पूरा नहीं होगा। अत: आप अपने विचार अवश्य लिखें। 

लेटेस्ट पोस्ट

टेक्निकल लोचा.......

September 18, 2017

हमारे देश में तरह तरह के लोचे होते रहते हैं। कभी केमिकल लोचा हो जाता है तो कभी टेक्निकल लोचा। राजनीतिक और धार्मिक लोचे तो आए दिन होते ही रहते हैं। वैसे लोचा करने को लुच्चई कहते हैं कि नहीं ये नहीं पता। लेकिन इतना जरूर पता है कि लोचा और लुच्चई एक दूसरे के सगे-सम्बन्धी जरूर हैं और दोनों हमारे देश में …

Read more

हर कीमत पर जो बिकने को...

September 10, 2017

हर कीमत पर जो बिकने को, बैठे हैं बाजारों में।  

भ्रस्टाचार वो ढूंढ रहे हैं, औरों के किरदारों में। 

 

जिनको  हम समझे…

Read more

कहना तो, हर बार मान लेते हैं....

August 18, 2017

हम उनका कहना तो, हर बार मान लेते हैं.

जो झूठे वादों से, हम सबकी जान लेते हैं.

               

कहा था जनता के, खाते में पैसे आयेंगे,…

Read more

दर्द होता रहा, छटपटाटे रहे.....

August 18, 2017

दर्द होता रहा, छटपटाटे रहे, 
भ्रष्ट सिस्टम से हम, चोट खाते रहे.

फूल जन्माष्टमी पर, चढ़ाये बहुत, 
फूल गुलशन के बस, मुरझाते रहे.…

Read more

….. मुद्दों पे बातें, मना है।

July 18, 2017

आजकल के मुद्दों पे, बातें मना है 

क्योंकि ये सरकार की, आलोचना है। 

 

मर गये सैनिक, तो जी डी पी घटेगी?, 

कृषकों के मरने से…

Read more

वादों का कभी, हिसाब नहीं मिलता

July 17, 2017

उनके वादों का कभी, हिसाब नहीं मिलता।

सवाल तो बहुत हैं, पर जबाब नहीं मिलता।

 

जो भी विपक्ष में हैं, बस वो ही भ्रष्टाचारी,…

Read more

मुद्दे हजार, वोटर लाचार (व्यंग्य)

January 23, 2017

इधर चुनाव का ऐलान हुआ, उधर जनता का भाव बेमौसम की सब्जियों की तरह आसमान पर जा पहुँचा। पाँच साल से नौकर से भी बदतर जीवन जीने को मजबूर जनता, अचानक अपने को अदानी-अंबानी की तरह मालिक समझने लगी है। पाँच साल से बिजली पानी को तरसती जनता, नेताओं को एक एक वोट के लिए तरसाना चाहती है। नेता भी पाँच हफ्ते, अपने क…

Read more

(व्यंग्य) देश बचाने का मौसम.....

January 21, 2017

हमारा देश त्योहारों का देश है। मौसम के अनुसार यहाँ तरह तरह के त्योहार मनाये जाते हैं। कभी कभी ये लगता है कि जनता त्योहार मनाने के लिए ही पैदा हुई है। आजकल देश में चुनाव का त्योहार चल रहा है। जैसे हर त्योहार मनाने के कुछ कर्मकाण्ड होते हैं, वैसे ही चुनाव के त्योहार को मनाने के भी कुछ अलिखित परम्पराएं…

Read more

(व्यंग्य) खुश है जमाना आज.....

December 31, 2016

खुश है जमाना आज पहली तारीख है। यह गाना 30-40 सालों के बाद 2017 मे जाकर अपने लक्ष्य को प्राप्त हुआ है। पहली बार आम हों या खास, नेता हो या अभिनेता, गरीब हो या अमीर, नए साल पर सब खुश हैं। सरकार खुश है, विपक्षी खुश हैं।  सरकार समर्थक तो खुश हैं ही, सरकार विरोधी भी खुश हैं। तकलीफ में लाइन लगने वाला कुछ क…

Read more

( व्यंग्य) जनता उम्मीद से है....

December 25, 2016

हमारे देश में सबसे आसान काम अगर कोई है तो वो है, जनता में उम्मीद जगाना। जनता बस तैयार बैठी है उम्मीद लगाने के लिए। बस एक दो मुद्दे तबीयत से उछालो। दो चार बार गरीब- गरीबी, भ्रष्टाचार-घोटाले का जाप करिए, बस जनता उम्मीद से हो जाती है। पिछले सत्तर सालों से हर चुनाव में जनता को उम्मीद होती है। और कुछ दिन…

Read more

View older posts »

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.