Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

मित्रों की रचनाएं

सब पुराने भरम मिटाने हैं

सब पुराने भरम मिटाने हैं 
गीत अब कुछ नए सुनाने हैं 
एक नए दौर की ये आहट है
अब नए रास्ते बनाने हैं

देखो कितनी बदल गई दुनिया
जख्म अभी वही पुराने हैं 
तुम बढ़ो हम बढें सभी मिलकर 
अब कदम से कदम मिलाने हैं 

कौन रोकेगा कारवां को अब
दांव पर लग गए दीवाने हैं 
आदमी आदमी से नफरत क्यों 
सब बराबर हमें बनाने हैं 

अपनी आदत सभी बदल लें अब 
यह नए दौर के तराने हैं 
देख कर जांच कर दवा देंगे 
मर्ज जड़ से हमें मिटाने हैं 

कुछ नया हम करें चलो मिलकर 
अब नए दांव आजमाने हैं 
दर्द की दास्तां कुछ ऐसी है 
जो न सुन पाए वही सुनाने हैं

दूर अपना रहे न अब कोई
हमसे बिछड़े हैं जो मिलाने हैं 
अपनी किस्मत खुद ही बनाएंगे 
वो जो वादे थे सब निभाने है।

– तनवीर हसन

जिसने सृष्टि बसाई.....

जिसने सृष्टि बसाई, लोग उनको बसाने लगे
कुछ लोग मिलकर, राम मंदिर बनाने लगे
अब फिर से राम जी, याद आने लगे
दौड़ दौड़ के पानी में, मीटिंग बुलाने लगे

देखो जरा कहीं, चुनाव तो नहीं आया है
जिसके पीछे, पानी पर दरबार सजाया है
नेता जी पानी में फिर, आग लगाने लगे
कुछ लोग मिलकर, राम मंदिर बनाने लगे

अब बनवास, कट जायेगा मेरे राम का
बन जायेगा महल, भगवान के नाम का
जोर शोर से अब, ए खबर फैलाने लगे
कुछ लोग मिलकर, राम मंदिर बनाने लगे

कब तक ऐसे, जात धरम में खुद को बाटेंगे
जो बोयेंगे माटी  में, वही अजल तक काटेंगे
वे अब आफ़ताब को भी, दीपक दिखाने लगे
कुछ लोग मिलकर, राम मंदिर बनाने लगे

गुरबत  में, अमीरी के सपने, सुहाने लगे
कुछ आलिम जोर जोर से, चिल्लाने लगे
जिसने सृष्टि बसाई, लोग उनको बसाने लगे
कुछ लोग मिलकर, राम मंदिर बनाने लगे

  • संजय भारती

फर्ज

हिलती जमीन
टूटते घर
सैलाब में
बहते हुए
नगर के नगर । 
लाशों के ढ़ेर
चारों और अंधेर
टीवी वाले 
कुछ भी कहे
ये सब है लेकिन
किस्मत के फेर । 
कभी समन्दर में
घटा था
आज पहाड़ पर 
फटा है
कल को 
हो सकता है
मैदान भी रोये
और कोई 
हमारा भी
अपनों को खोये । 
आज हम 
सकुशल है
तो आओ
किसी की ज़िम्मेदारी
उठाये
दिल खोल कर
मदद करे
और अगर इंसान है
तो 
इंसान होने का 
फर्ज निभाये । 
----त्रिलोक नाथ तिवाड़ी

थोड़ा सा चाँद...

कई दिनों की
हाड़ – तोड़
मेहनत के बाद
पृथ्वी सिंह
अपने बेटे की
थाली में
रोटी का
एक
टुकड़ा देख
पाया है ।
चाँद थोड़ा
ही
सही
मगर आज
उसके घर
में
आया है । ।


----त्रिलोक नाथ तिवाड़ी

बेचारा चाँद !!!

पूर्णिमा की
पूरी रात
सरोवर के
किनारे
बैठी – बैठी
वो
रूपसी
पानी में
अपनी और
चाँद की
छवि देख,
चाँद को
इस प्रकार
लजाती और
डराती रही
कि
बेचारा चाँद
सुबह
होते ही
मैदान छोड़ के
भाग गया ।

----त्रिलोक नाथ तिवाड़ी

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

आपकी राय

फटाफट पेपर लीक हो रहे हैं और झटपट लोगों तक पहुंच जा रहे हैं खटाखट जनप्रति निधि माला माल हो रहे हैं निश्चित ही विश्व गुरू बनने से भारत को कोई माई का लाल रोक नहीं सकता।

Very nice 👍👍

Kya baat hai manoj Ji very nice mind blogging
Keep your moral always up

बहुत सुंदर है अभिव्यक्ति और कटाक्ष

अति सुंदर

व्यंग के माध्यम से बेहतरीन विश्लेषण!

Amazing article 👌👌

व्यंग का अभिप्राय बहुत ही मारक है। पढ़कर अनेक संदर्भ एक एक कर खुलने लगते हैं। बधाई जानी साहब....

Excellent analogy of the current state of affairs

#सत्यात्मक व #सत्यसार दर्शन

एकदम कटु सत्य लिखा है सर।

अति उत्तम🙏🙏

शानदार एवं सटीक

Niraj

अति उत्तम जानी जी।
बहुत ही सुंदर रचना रची आपने।

450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c

हमसे संपर्क करें

visitor

926250

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...