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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...
हम रामराज्य ले आएँगे, हमपे केवल एतबार करो
तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

तुम भोली- भाली जनता हो, भारत में तुम्हारा खाता है।
लेकिन हम जो भी खाता है, सीधे स्विसबैंक में जाता है।
तुमको भी मौका मिलेगा बस, पहले मेरा घर-बार भरो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

टूजी, कोयला घोटालों में, बस घूस कमीशन खाएँगे।
जब तुम ज्यादा चिल्लाओगे, सीबीआई जाँच कराएंगे।
तुम तो केवल सीबीआई की, जाँचों पर एतबार करो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

हम बस भावना भड़काएंगे, दंगे -फसाद करवाएंगे ।
खुुद नरक में हम तो जी लेंगे, बस स्वर्ग तुम्हें पहुंचाएंगे।
अपना न बाल बांका होगा, तुम पब्लिक हो, हर बार मरो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

हम तो बस मौज उड़ायेंगे, और चिकन तंदूरी खाएँगे।
तुम पैदल चलने को तरसो, हम सैर हवाई जायेंगे।
तुम तो सड़कों के गड्ढों को, चाहे नावों से पार करो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

तुम काम-धाम क्यों करते हो? चुप बैठो और आराम करो।
हम पेट तुम्हारा भर देंगे, तुम वोटए हमारे नाम करो।
हम सीधे पैसा भेजेंगे, तुम तो केवल आधार धरो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

हम पाँच साल में आएँगे, और सब्जबाग दिखलायेंगे ।
जो जीत गए, तो क्षेत्र में अपने, कभी नजर ना आएँगे।
तुम मुझे देखने को जानी, ना दिल अपना बेकरार करो,

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

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आपकी राय

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आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...