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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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इस आशिकी में....

May 12, 2015

इस आशिकी में हाल जो, दिल का हुआ, हुआ।
मत पूँछिये मुझसे कि, मुहब्बत में क्या हुआ।

ताउम्र चलेगी ये, गमे इश्क की दौलत;
खायेंगे सारी उम्र, तुम्हारा दिया हुआ।

हमने दुआ सलाम में, यूँ सर झुका दिया;
उसने समझ लिया कि, हमारा खुदा हुआ।

मिलने से पहले उनसे, थी खुशहाल जिन्दगी;
डूबा गमों में जब से वो, मिलकर जुदा हुआ ।

मदहोश थे मिलन में, जुदाई में बदहवास;
जाने वो हमसे कब मिला, और कब जुदा हुआ।

वो कहें तो जान भी, ये सोचकर मैं सौंप दूँ;
हक उनका मुझपे 'जानी', कुछ तो अदा हुआ।

 

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