Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

आँखों में नहीं......

October 31, 2013

आँखों में नहीं, दिल में, उतर जाएँ कभी तो

दरवाजे खुले हैं, वो इधर आयें, कभी तो ।।

 

मुमकिन नहीं है, मंजिले पाना तो क्या हुआ?

हम-राही में ही, वक्त गुजर जाये, कभी तो।।

 

महंगाई - भ्रष्टाचार में,  जो लोग पिस रहे,

उनकी भी जिन्दगी में, सहर आये कभी तो।।

 

माहौल अपने मुल्क का, अब वो बनाइये,

कि हर गुनाहगार भी, डर जाये कभी तो।।

 

ये सोच के, हर बार उन्हें, वोट किया है,

ये शख्स-सियासी भी, सुधर जाएँ कभी तो।।  

 

ईमान बदलकर, जो दिए दूसरों को दर्द,

एकबार वो भी चाक-जिगर, पायें कभी तो।

 

जीने की ख्वाहिशें भी,  होती  जरुर  हैं,

मिलते ही उनसे आँख जो, मर जाएँ कभी तो।

 

दिल की बुझेगी प्यास, औ छाएगी घटा भी,

जुल्फों को अपनी खोलके, लहराएँ कभी तो।

 

एक बार  ही  निगाह, वो  हमपर भी डाल दें,

किस्मत भी अपनी ‘जानी’, संवर जाये कभी तो। 

Go Back

Wah wah .... ... kya baat hai... lll



Comment