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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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आदमी चाँद पर ----

July 4, 2013

अम्बर के आंसू सूख गये

तारो ने हंसना बंद किया

पुष्प गंध प्रेमी उधौ  ने

अब तो बारूदी गंध पिया

            कलियों  ने घुंघट तोड दिये

            अब उनमें लज्जा वास नहीं  

            मानवता प्रेमी भौंरे को

            अब मधुर मधुप की आस नहीं  

अब बिन दहेज के बहुओ की

तो, माँग भरी ना  जाती है

जिस माँ ने बेटी जन्म दिया

सिर धुन-धुन कर पछताती है  

            है कोयल का अपमान आज

            कौओं  की पूजा होती है  

            इस कंप्यूटर  वाले युग मे

            उत्कोच ज्ञान की ज्योति है

दो चार उठे तो क्या होगा

तुम, सबको साथ  उठाओ गर

“जानी” फिर हम भी मानेंगे

आदमी आज पहुचा शशि पर …….. 

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