Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

यह कैसा है लोकतन्त्र ?

यह कैसा है लोकतन्त्र?
कैसा यह जनता का राज
सहमी-सहमी जनता सारी
कैसा है ये देश आजाद ?

          जनमों के दुश्मन कुर्सी हित
          पल में,  बन जाते  हैं मीत
          गुण्डे तो,  नेता  बन  घूमें,
          सज्जन हैं, घर में भयभीत

धर्म-जाति में भेद  बढाकर
सिखलाते आपस में  प्रीति
नेता   आज  वही बन  बैठा
छोड दिया है जिसने नीति

           राजनीति तो बनी है साधन
           केवल, पाने को अब राज!
           यह  कैसा  है लोकतन्त्र ?
          कैसा यह जनता का राज ?

लूट रहे हैं सभी,  देश को
देश -प्रेम,  बस नारों से !
जाति,धर्म ही जनता देखे
परखे ना, ब्यवहारों से !

                 कर्तब्यों को,  कोई न देखे      
                 मतलब बस, अधिकारों से !
                 पार्टी की पहचान आजकल 
                 होती  है,  परिवारों   से !

ऐसा क्यूं अंजाम हो रहा?
जबकि अच्छा था आगाज
यह कैसा है लोकतन्त्र ? 
कैसा यह जनता का राज?

             आजादी,  इतनी क्यूं है कि
             जितना  चाहो,  लूटो देश ?
             नयी नस्ल को, आज दे रहे
             जाने हम कैसा परिवेश ?

सत्ता पर कब्जा है जिनका
समझ रहे,  खुद को सर्वेश !
करें देशहित,  देश बेंचकर
देते इसको  नाम,  निवेश !

           बस चुनाव में ही, आती है,
          जानी क्यों जनता की याद?
          यह कैसा है  लोकतन्त्र ?
          कैसा यह जनता का राज ?

लोकतन्त्र की सरकारें अब
जनता से,  हो  रही हैं दूर
भ्रष्टाचार,  दमन,  घोटाले
सहने को, जनता मजबूर

             जुल्म और बेईमानी, चुप हो
             देख रहा है, सभ्य समाज !!
             यह  कैसा  है  लोकतन्त्र ?
             कैसा यह जनता का राज ?

पाक साफ अब केवल वो ही,
जिनके पास है पावर-पैसा,
जो कमजोर, विपक्ष में है जो,
भ्रष्ट नहीं है, उसके जैसा ।

              जो विपक्ष में, दागी-खूनी,
              मिलते ही हो जाता पाक ।
              सत्ता हित, दुश्मनी –दोस्ती,
              जनता रह जाती है अवाक।

चुप विपक्ष, नतमस्तक मीडिया,
कौन  बने  जन  की  आवाज ?
यह  कैसा  है  लोकतंत्र ?
कैसा यह जनता का राज ?

Go Back

Comment

आपकी राय

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

अति सुन्दर

Very good

हमेशा की तरह उच्च कोटि की लेखनी....बहुत गहराई से, बहुत अर्थपूर्ण ढंग से व्यंग्य के साथ रचना की प्रस्तुति!

Bahut khoob bhai👏👏👏👌💐

Aur hamesha prasangik rahega…..very well written

हर समय यही व्यंग्य चुनाव पर सटीक बैठता है ❤️❤️❤️

असली नेता वही, जो जनता को पसंद वही बात कही , करे वही जिसमें खुद की भलाई , खुद खाये मलाई, जनता को दे आश्वासन की दुहाई

450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9

हमसे संपर्क करें

visitor

742464

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...