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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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सेवलान का धुला

धुलना और धोना हम भारतीयों का जन्मसिद्ध अधिकार है। धोने और धुलने की कला का आविष्कार हम भारतीयों ने ही किया है और उसपे हमलोगों का ही कापीराइट है। दुनिया के लोग तो पानी या पेट्रोल से सफाई करते हैं, पर हम भारतीय, पता नहीं किस किस चीज से दूसरों को धोते हैं, साफ करते हैं। पुराने जमाने में लोग सफाई के लिए धुलते थे। आजकल लोग एक दूसरे को‘साफ’करने के लिए उनकी धुलाई करते हैं। जब हमारे देश में दूध की नदियाँ बहती थी, तब हमारे पूर्वज किसी साफ सुथरे आदमी को‘दूध का धुला’कहते थे।

इसके बाद एसा कलयुग आया कि एक डिटर्जेंट ने तो बाक़ायदा नारा दिया कि फलां पाउडर है तो‘दाग अच्छे हैं’। कलियुग के बाद डिटाल का सतयुग आया और लोग‘डिटाल के धुले’होने लगे। इसके लिए सरकार अपने उस मंत्री का इस्तीफा दिला कर, जिसके ऊपर भ्रष्टाचार का आरोप होता था, अपनी सरकार को‘डिटाल का धुला’कर लेती थी। लेकिन जैसे डिटाल, जलन करता है, वैसे ही यह डिटाल का धुला होना भी सरकार को दर्द देता था। इसलिए अब डिटाल का धुला होना ओल्ड फैशन हो गया है।

सरकार की बेहद माँग पर अब मार्केट में सेवलान आ गया है। धुलाई की धुलाई, मजे का मजा। बिना दर्द, बिना जलन। जनता से लेकर नेता तक सभी आजकल सेवलान से धुलने का परमानन्द ले रहे हैं। हींग लगे ना फिटकरी, रंग चोखा होय।‘सेवलान के धुले’महात्मा आजकल देश के कोने कोने में अवतरित हो चुके हैं। जो खुद को सेवलान से धुलने के बाद दूसरे पर कीचड़ फेंकने में उस्ताद हैं।

देश कि सबसे पहली सेवलान की धुली आत्मा, परम पूज्य अनशन बाबा के प्रिय भक्त केजरीवाल जी हैं। स्वयंभू, स्वप्रमाणित संत बाबा केजरीवाल जबसे सेवलान में डुबकी लगाकर बाहर आए हैं, तब से कांग्रेस और भाजपा को भ्रष्टाचार में गोते लगवा रहे हैं। सेवलान के धुले केजरी जी ने चुन चुन कर भाजपा और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के जो रंग डाले कि उनको दिल्ली से ही साफ कर दिया।

लेकिन जैसे कहते हैं कि वह अकल किस काम की, जो नकल ना कर सके। तो कांग्रेस और भाजपा भी जल्द ही सेवलान से धुलने के गुर सीख गए। और इतना सीख गए कि बाबा केजरी को ही भ्रष्टाचार में डुबाने लगे। सेवलान ने नेताओं का काम इतना आसान कर दिया कि किसी पर कितना ही बड़ा भ्रष्टाचार का आरोप लगे, मैगी के दो मिनट की तरह, दो मिनट में सभी नेता सेवलान से धुलकर खुद को सबसे ईमानदार होने का सर्टिफिकेट देने लगते हैं।

आज हर पार्टी के पास विशाल सेवलान का भण्डार है। विरोधी पार्टी के भ्रष्ट नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करते ही सेवलान से धुला करके पाक-साफ कर देते हैं। फिर किसी जाँच, इंक्वायरी की जरूरत ही नहीं रह जाती। सारी राजनीतिक आत्माएं सेवलान का धुला होकर विधानसभाओं और लोकसभाओं में कैसे सुशोभित हो रही हैं।

ये तो मीडिया है जो इन महात्माओं पर भ्रष्टाचार का तिलक लगाकर उनकी‘कीर्ति’ फैलाते रहते हैं और‘दाग अच्छे हैं’का नारा देते हैं। वरना तो सेवलान के अच्छे दिन आ गए हैं। सेवलान के धुले ने कह दिया कि वह साफ-पाक है, ईमानदार है, वही बहुत है। इसकी जाँच के लिए सीबीआई, ए सी बी, या पुलिस को क्यों परेशान करना??? क्या हमारे सेवलान के धुले नेताओं पर हमें इतना भी भरोसा नहीं है कि उन्हे अलग से जाँच करवा के पाक-साफ होना पड़े? ये तो पक्का सेवलान के डिफेमेशन का केस बनता है।

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Comment

आपकी राय

Very nice Sir, you always highlight important point of the country.

भाई रावण कब तक जलाएंगे लाखों खुले आम घूम रहे हैं उनका क्या होगा और कब होगा??

Wha kya baat hain.

एकदम झन्नाटेदार थप्पड़ की तरह रसीद किया है भाई आपने ये जागरूकता चरस भरा व्यंग्यात्मक लेख। उम्मीद है कि hard-core चरसीयों पर भी भारी पड़े आपका ये जागरूक करने वाला चरस।

आप का व्यंग्य बहुत अच्छा है ,एक चुटकी चरस का असर बहुत है।

Jara saa vyngy roopi charas bhii chakh lenaa chahiye .Dil khush ho jaataa hai.bahut khoob kaha......

सटीक व्यंग्य। फ़िल्म में किसी महा पुरूष या स्त्री का किरदार निभाकर क्या वास्तविक जीवन में भी वैसा होने का दावा कर सकता/सकती है। इसके नकारात्मक पहलू को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता । डायन/ चुड़ैल/ वेश्या / चोर/ डकैत/ बलात्कारी का किरदार निभाने वालों के बारे में केवल कल्पना करें तो...

Bahut khub sir

वास्तविकता यही है। सम्मान की भावना नहीं है कहीं भी।

Waw that's so funny but to the point

Ati uttam sir

उचित कहा, यह हमारी विडंबना है कि हमें हिन्दी पखवाड़ा मनाना पड़ता है |

बहुत सुंदर प्रस्तुति। वास्तव में ये बड़ी विपरीत धारणा हमारे देश मे है कि हिन्दी भाषी लोग पिछड़े होते है शायद इसी कारण अंग्रेजी में बात करना लोग अपनी शान और अग्रिम पंक्ति में बने रहना मानते है। आपको बहुत बधाई। आगे भी आपकी व्यग्य यात्रा और विकसित स्तर पर पहुचे। शुभकामनाये

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...