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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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गजलें

गुनहगार भी तुम्हीं..

बहुत देर तक रहा.....

हिसाब क्या देंगे ?

सारे मसले, बारी बारी लिया करो......

जनता की आह यूँ ही, बेकार नहीं होती ....

लोग मरते रहे ....

हम आदमी ही आदमी का, मांस खा रहे हैं....

चन्द चेहरे जो, तमतमाए हैं...

हर कीमत पर जो बिकने को...

हम उनका कहना तो, हर बार मान लेते हैं.

…मुद्दों पे बातें, मना है।

वादों का कभी, हिसाब नहीं मिलता

यूँ तो मयखाने से हम दूर बहुत रहते हैं

फिरता है...

उनकी नजरों का.......

इस आशिकी में....

किसानों पे सियासत

वो है ईमानदार, जो, पकड़ा ना गया हो.......

आँखों में नहीं......

सियासत की फसल

है बहुत दुशवार जीना........

जताते नहीं हैं लोग ......

आईने साफ करते हैं।

हम उनसे मुहब्बत का...

शराफत देख बन्दों की.......

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कविताएं

बाबा फूले ने राह दिखाई है.........

जोगीरा सा रा रा रा रा … (होली स्पेशल) - 2024

अब तो जाग ससुर के नाती...

फिर इलेक्शन आ रहे हैं…

कौन मरेगा, फिक्स है............

अपना संविधान है.... (संविधान दिवस पर )

पहली शिक्षक सावित्री माई...

सावित्री माई गीत

शिक्षा हमें समान चाहिए…

रावण की औलादें हैं जो........

हे भारत के बहुजन बोलो..............

हम भी लूटें, तुम भी लूटो.........

फिर से इलेक्शन आ रहे है।

बढ़िया है... भई...बढ़िया है...

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...

करेक्टर वाली गाय.......

दर्द होता रहा, छटपटाटे रहे.....

वो चिंता पे चिंता, किये जा रहे हैं।

वीर सपूत

यह कैसा है लोकतन्त्र ?

बारी -बारी देश को लूटें ..........

हिन्दी पखवाड़ा .......

किसे चाहिए वैरागी ? हर दल मांगे, केवल दागी

बटला काण्ड पर रोईं सोनिया

हालात कुछ एसे बनाए जा रहे हैं ।

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