मुंसिफ भी हो तुम्ही, और गुनहगार भी तुम्हीं।
तुम ही हो कार्पोरेट, और सरकार भी तुम्हीं।
जनता को कौन राह, दिखाएगा आजकल,
तुम ही तो हो मशाल, अन्धकार भी तुम्हीं।
नफरत हो, फेक न्यूज़ हो, मुद्दों को दबाना,
मीडिया हो चौथा खंभा,अखबार भी तुम्ही।
कितना भी पाप, जुल्म बढ़े, राज मे…