बाबा फूले ने राह दिखाई है।
गुलामगीरी सबकी छुड़ाई है।
राष्ट्रीयता आए ना सब में,
जब ना जाति का भेद मिटे।
होगा ना संघर्ष सफल भी,
जब तक ना ये जाति छुटे।
नाई काटे बाल, ये उसका
धरम नहीं है, बस धंधा है।
पूजा पाठ कराना भी तो,
भक्ति नहीं, बस धंधा है।
इतनी बात ना जिसने जानी,
आँख है फिर भ…