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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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गजलों की सूची

गजल / कविता

हर कीमत पर जो बिकने को...

September 10, 2017

हर कीमत पर जो बिकने को, बैठे हैं बाजारों में।  

भ्रस्टाचार …

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हम उनका कहना तो, हर बार मान लेते हैं.

August 18, 2017

हम उनका कहना तो, हर बार मान लेते हैं.

जो झूठे वादों से, हम सबकी जान लेते हैं.…

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…मुद्दों पे बातें, मना है।

July 18, 2017

आजकल के मुद्दों पे, बातें मना है 

क्योंकि ये सरकार की, आलोच…

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वादों का कभी, हिसाब नहीं मिलता

July 17, 2017

उनके वादों का कभी, हिसाब नहीं मिलता।

सवाल तो बहुत हैं, पर जबाब नहीं मिलता।…

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यूँ तो मयखाने से

January 31, 2016

यूँ तो मयखाने  से, हम दूर बहुत रहते हैं।

तेरे नशे में मगर, चूर बहुत रहते हैं।…

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फिरता है...

January 1, 2016

वो मेरे कत्ल का, सामान लिए फिरता है।

सिर्फ हिंदू, या मुसलमान किए फिरता है।…

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उनकी नजरों का.......

January 1, 2016

उनकी नजरों का जब से, इशारा हुआ।

दिल मुहब्बत का तब से, है मारा हुआ।…

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इस आशिकी में....

May 12, 2015

इस आशिकी में हाल जो, दिल का हुआ, हुआ।
मत पूँछिये मुझसे कि, मुहब्बत में क्या हुआ।…

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किसानों पे सियासत

May 12, 2015

लाचार सी , मायूस, नजर देख रही है।
मिलती जिधर मदद है,उधर देख रही है।…

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वो है ईमानदार, जो, पकड़ा ना गया हो.......

January 5, 2014

किस काम जवानी है, जो ज़ुल्फों में ना उलझे,

और हुस्न के फंदे में जो, जकड़ा ना गया हो।…

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...