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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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….. मुद्दों पे बातें, मना है।

July 18, 2017

आजकल के मुद्दों पे, बातें मना है 

क्योंकि ये सरकार की, आलोचना है। 

 

मर गये सैनिक, तो जी डी पी घटेगी?, 

कृषकों के मरने से, क्या बिगड़ा-बना है?  

 

फ़र्ज़ी तस्वीरों से लेकर वीडियो तक,

हर खबर, सरकार की आराधना है ।  

 

आज जो खबरें हैं, कल वो फ़ेक होगा, 

न्यूज में खबरें नहीं, अफ़वा घना है।  

 

गाय पर लो जान, मुस्लिम की दलित की

रक्षकों का हाथ, खूनों से सना है। 

 

हम कड़ी निंदा के बम, फेकेंगे केवल,

हर पड़ोसी आजकल, अपना तना है।  

 

जान तो बस जनता की जाएगी ‘जानी’, 

जनता का सरकार से, जब सामना है।

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...