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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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हर कीमत पर जो बिकने को...

September 10, 2017

हर कीमत पर जो बिकने को, बैठे हैं बाजारों में।  

भ्रस्टाचार वो ढूंढ रहे हैं, औरों के किरदारों में। 

 

जिनको  हम समझे थे मांझीछोड़ दिये मंझधारों में  

आज कबीले के ही कातिशामिल हैं सरदारों में  

 

प्यार पे पहराघर-बाहर काकोर्ट-कचहरी थानों का, 

लव-जेहाद से, खाप से देखो, खौफ मचा दिलदारों में।  

 

उलझा देंगे जाति-धरम में, जब तक कुछ भी सोचेंगे,    

सारी दुनिया आके फँसी है, धरम-जाति हथियारों में।  

 

दंभघोटालेझूंठ आँकड़ेविज्ञापन में दावों से, 

खुद को ख़ुदा समझते ही हैं, रहते जो सरकारों में। 

 

ट्रेन-बाढ़ में, अस्पताल में, रोज ही पब्लिक मार रहे

मेरे मसीहा छुट्टी ले लोकम से कम इतवारों में  

 

हर भाषण में झूठे वादे, रोजी-रोटी के यारों,

दावे हुए खोखले इतनेयकीं नहीं अ नारों में।  

 

 सच कहें, सुने ना सच को, देखें और दिखाएं ना

चरणवन्दना बहुत हुई अब, खबर छपे अखबारों में।  

 

हे इंसाफ की देवी खोलो, अपनी आँख कि पट्टी तुम, 

सिर्फ तराजू क्या कर लेगा, जंग लगी तलवारों में।  

 

सच से होता खौफ़ हमेशासत्ता के गलियारों में। 

अब के तानाशाहों के हैं, नायक बस हत्यारों में। 

 

नेता-मीडिया-बिजनेसमैन का, ये गठजोड़ सलामत है, 

कौन कहेगा अब सच जानी’, सभी झुके दरबारों में। 

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