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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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सर्वे की मारी, जनता बेचारी .... (व्यंग्य)

हे कलियुगी पाठकों, इस कलयुग में अगर कुछ सत्य है, तो वो है सिर्फ और सिर्फ खबरिया सर्वे। अभी-अभी बादामगिरी खाकर दिमाग पर ज़ोर दिया तो यह दर्शन समझ में आया, कि इस क्षणभंगुर संसार में सर्वेगीरी के अलावा, सारा जगत मिथ्या है। जनता मिथ्या है, उसके मुद्दे मिथ्या हैं। समाज मिथ्या है, देश मिथ्या है, लोकतन्त्र मिथ्या है। अगर कुछ सत्य है तो वो है मीडिया का सर्वे। रोज रोज के सर्वे से कंफ्यूज भक्त, ऋषिवर की शरण में जाता है और लंब लोट दंडवत होकर ऋषिवर से अपनी परेशानी को पेशानी पर लाकर पूंछता है।

भक्त: ऋषिवर ये रोज-रोज के सर्वे जो न्यूज चैनलों और अखबारों में दिखाये जाते हैं, ये सब मन को कंफ्यूज से भर रहे हैं। आखिर क्या बात है कि नौकरी खोकर भी, आमदनी घटाकर भी, महंगाई सहकर भी, बिना कमाई बढ़ाए, खर्चे बढ़ाकर भी, लोग सर्वे में सरकार के पक्ष में हैं खड़े हैं। इसका गूढ रहस्य न समझ पाने से मन व्यथित हो रहा है। कृपया मेरी शंका का समाधान करें, इन सर्वे का रहस्य समझाएँ और इस भक्त को कन्फ़्यूजन से बाहर निकालें।

ऋषिवर: वत्स, इस कलयुगी सर्वे से किंचित भी चिंतित ना हो। ये सर्वे, जम्बूद्वीप में एक छलावा है, माया है, जो पैसे वाली पार्टियों को बहुत भाया है। इस पवित्र भारतभूमि पर सर्वे करने वालों को और गुप्तरोग के विज्ञापन करने वालों को, आजतक किसी ने नहीं देखा है। इस चराचर जगत में, इस देवभूमि में, सर्वे और सेक्स एक समान हैं। दोनों ही छुपकर किए जाते हैं। इसके बाद भी जिस तरह से इस पुण्यभूमि की जनसंख्या, अरबों में पहुँच गई, वैसे ही इन गुप्त विज्ञापनों से, सारी.... .... सर्वे से, चैनलों की कमाई भी अरबों में पहुँच जाती है।

वत्स, जब हमारे नेतागण जनता से ‘फेस-टू-फेस’ मिलने की बजाय, ‘फेसबुक’ पर हरदम आनलाईन रहते हैं। संसद में किसी भी मुद्दे पर आवाज उठाने की जगह,  सोशल साइट्स पर हर दो मिनट में ‘ट्वीटियाते’ रहते हैं। ‘ज़ेड प्लस’ में चलने के कारण, जनता से मिलने के बजाय ‘मोबाइल एप्प’ के जरिये उनके साथ फोटो खिंचवाते हैं, एसे नेताओं को अपने कामों पर नहीं, सर्वे के परिणामों पर ही भरोसा होता है। और इन सर्वे के लिए जो जितना खर्च करे, सर्वे का परिणाम उसके लिए उतना ही थाली में परोसा होता है।

भविष्यद्र्ष्टा प्रभु को सर्वे का महात्म्य पता है। उन्हें अपनी प्रजा के भेंडचाल वाले चरित्र का भी बखूबी ज्ञान है। व्हाट्सअप्प विश्वविद्यालय से प्रभू ने अपने भक्तों को अनुलोम-विलोम कराकर इतना प्रशिक्षित कर दिया है, कि अब उनको सिर्फ एक इशारा करना ही काफी होता है, किसी भी रास्ते पर दौड़ाने के लिए। प्रभू जानते हैं कि जैसे भेड़ों के समूह में सभी भेंड़े सर झुकाये एक के पीछे एक चली जाती हैं, और अगर आगे वाली कुएं में गिर जाये तो सभी भेंड़े लाइन से उसी कुएं में गिरती चली जाती हैं। उसी तरह, जम्बूद्वीप वासी, जब सर्वे में देखेंगे कि लोगों का बहुमत किस पक्ष में है, तो वो भी भेंडचाल में चल पड़ेंगे। यानी अपने नश्वर वोट को प्रभु चरणों में उसी तरह अर्पण कर देंगे, जैसे सर्वे में दिखाया गया है। क्योंकि व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के ज्ञान वर्षा से भक्तों की इड़ा, पिंगला, और सुषुम्ना आदि सभी नाड़ियाँ पहले ही निष्क्रिय कर दी हैं, और उनपर किसी भी बाहरी संवेदना या सूचना का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। एसे सम्मोहन में, जिधर सर्वे बताए, व्हाट्सप्प आज्ञाकारी शिष्य, उधर ही जाये।

सर्वे का महत्व, इतने भर ही सीमित नहीं है वत्स! नौकरियाँ जाने पर भी लोग संतुष्ट हैं, यह हमारी सनातन संस्कृति की जीत है। आजकल के सर्वे, भारतीय महामानवों के उच्च स्तर के गीता-ज्ञान का द्योतक है। यानि संन्यास और वैराग्य का चरम बिन्दु है। गीता-ज्ञान क्या है, तुम्हें बताता हूँ वत्स! सुनो- तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाये थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो तुमने खो दिया? न तुम कुछ लेकर आए, जो लिया यहीं से लिया। जो लिया, इसी (भगवान) से लिया, जो दिया इसी को दिया। तुम इसे अपना समझकर मगन हो रहे हो, बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दुखों का कारण है। वत्स! इस गीता ज्ञान में बस इतना और जान लो कि, कलयुग में सरकारें ही, जनता की भगवान हैं। तो वत्स! तुम्हीं सोचो, जनता क्यों दुखी हो? एसे वैराग्य के उच्चतम बिन्दु पर पहुंच चुकी प्रजा,…. सारी..., जनता, क्यों न प्रभु गुणगान करे?

भक्त: प्रभु आप महान हैं। मैं व्हाट्सप्प तो बहुत पढ़ रहा था, लेकिन मेरा ज्ञान नहीं बढ़ रहा था। इस सर्वे के भव-सागर से निकलने का कोई सहारा नहीं मिल रहा था । आखिर, सर्वे की मारी। जनता बिचारी। आपकी ज्ञान वर्षा ने मुझ अज्ञानी को उबारा। अब मुझे सर्वे की जरूरत और उसका महात्म्य, समझ आ गया। ऋषिवर आपकी जय हो।

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Comment

आपकी राय

Dignified india ,youtube par aapka song _shiksha hame saman chahiye,dhoom machaya raha hai

Dignified India , youtube par aapkaa song _ dhoom macha rahaa hai.

बहुत ही सुंदर और सटीक व्यंग है

Very nice Explained by you the real Scenario of our Nation in such beautiful peom by Sh.Manoj Jani Sir. Hat's off to you.

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...