Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

सम्मान एक शिक्षक का ! (व्यंग्य)

      हमारे महान देश में, गुरुओं की बहुत ही विकसित प्रजातियाँ पायी जाती हैं। गुरु-शिष्य परम्परा, शुद्ध देशी घी काल से डालडा काल तक बहुत ही संवृद्ध  रही है। वैसे हमारे देश की उर्वरा जमींन में, नाना प्रकार के गुरूओं की प्रजातियां पायी जाती हैं। कुछ गुरु विद्या मंदिरों  के आस पास लेक्चर देते हुये पाये जाते हैं, तो कुछ गुरू घनघोर प्रवचन वाची होते हैं, और विभिन्न टीवी चैनलों पर पाये जाते हैं। जिनके धुंआधार अमृत वर्षा से जगह जगह अध्यात्म के बादल फट रहे हैं। कुछ गुरू हैं, तो कुछ गुरुघंटाल हैं।

      वैसे गुरू चाहे स्कूल वाला हो, या अध्यात्म वाला, उनका सम्मान करना, हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। रामयुग से लेकर रामलीला युग तक, हमेशा गुरुओं को पूजने की परम्परा रही है। लेकिन इस एमएमएस युग में जब से गुरू टीचर हो गये, तब से गुरुओं के आदर सूचकांक में भारी गिरावट दर्ज की गयी है। जिससे  निपटने के लिये सरकार और गुरुओं ने कमर कस ली है। एक ओर जहां गुरू, शिक्षक दिवस मनाकर खुद को सम्मानित करते हैं, तो सरकार भी एक दिन गुरुओं का सम्मान करने से नहीं चूकती।

      इसी परम्परा को निभाने के लिये एकाएक हमारे सम्माननीय नेता जी को गुरू सम्मान करने का दौरा पड़ गया। आनन फ़ानन खबर आग की तरह फ़ैल गयी। लेकिन जैसा कि सभी शुभ कामों में बाधाएं आती हैं, वैसे ही गुरू सम्मान समारोह के लिये, एक अदद गुरू की समस्या आ खडी हुई। जब माइक्रोफ़ोनिया ग्रस्त, प्रवचन गुरुओं से सम्मान लेने के लिये संपर्क साधा गया तो, पता चला कि सबका किसी ना किसी चैनल के साथ सालाना कांट्रैक्ट है, जो कि लाखों में हैं। जब उनको ये बताया गया कि सम्मान में उनको (सिर्फ़) एक शाल दी जाएगी, तो लौकिक मोहमाया से ऊपर उठ चुके गुरुओं ने, निःस्वार्थ भाव से आने से मना कर दिया।

      लेकिन सम्मान तो करना ही था । सो किसी सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक की तलाश शुरू हुई। तुरन्त ही पण्डि़त रामभरोसे शर्मा जी को निमन्त्रण भेजा गया कि अमुक तिथि पर आकर सम्मान ग्रहण करें। लेकिन यह क्या, अमुक तिथि पर नेता जी शाल लेकर खड़े रहे और शर्मा जी नहीं आये। नेता जी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया । बोले, इस दो कौड़ी के मास्टर की ये औकात। हमने बुलाया और अभी तक नहीं आया। अपने चमचे से बोले, जाओ और जो भी टीचर मिले, उसे घसीट कर लाओ ।   

      चमचा भागा भागा स्कूल गया।    देखा वहां पर शर्मा जी पुरानी कुर्सी को तोड़ रहे थे। चमचा पहले तो सहम गया, फि़र हिम्मत करके पूंछा, गुरू जी ये क्या कर रहे हो? शर्मा जी बोले भई बच्चों की खिचड़ी (सरकारी स्कूल के दोपहर में दिया जाने वाला खाना) पकाने के लिये, लकड़ी का बन्दोबस्त कर रहा हूं। और शर्मा जी कड़ाही के नीचे भट्ठी में लकड़ी सुलगाने में ब्यस्त हो गये।

      चमचे ने उनसे पूंछा कि साथ वाले, वर्मा जी को ही सम्मान लेने के लिये भेज दो। शर्मा जी बोले, जब होगें, तभी भेजूंगा ना! वह तो प्रशिक्षण लेने के लिये गये हुये हैं। एक महीने बाद आयेंगे। और फि़र बच्चों की खिचड़ी  बनाने में ब्यस्त हो गये। चमचा भी कहां हार मानने वाला था। बोला, शर्मा जी अपने दूसरे साथी सम्पत लाल जी को ही भेज दीजिये।

      शर्मा जी धीरे से मुस्कुराये। बोले वह तो आपकी ही सेवा में लगे हैं। अभी भी आपका ही काम कर रहे हैं। चमचे ने आश्चर्य से शर्मा जी की तरफ़ देखा । शर्मा जी ने रहस्योद्घाटन किया, अरे भई वह वोटर लिस्ट बना रहे हैं। वह स्कूल तभी तो आंयेंगे, जब आपके काम से फ़ुरसत मिलेगी। वैसे भी इस देश को चुनाव की ज्यादा जरूरत है, पढाई की नहीं।

      चमचे ने फि़र दूसरा विकल्प सुझाया। लल्लू राम जी को ही भेज दीजिये। शर्मा जी चमचे की बात सुनकर  हंसते हुये बोले, आजकल लल्लू राम जी डाक्टरी कर रहे हैं। चमचे को गुस्सा आ गया। बोला, पढाने के समय डाक्टरी करते हैं। वेतन सरकार से लेते हैं, और डाक्टरी करके कमाई कर रहे हैं। शर्मा जी ने समझाया, भाई सरकार ने ही तो उन्हे डाक्टरी करने के लिये भेजा है। पूरे देश को पोलियो से निकालने के लिये, ड्राप पिलवाने के लिये सरकार ने ही तो लगाया है। चमचा शरमा गया। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। फि़र बोला, तो तिवारी जी को ही भेज दीजिये।

      इस बार शर्मा जी थोडा सकुचाते हुये बोले, भाई माफ़ करना ! बात एसी है कि तिवारी जी अपनी कोचिंग  चलाते हैं। और अभी ट्यूशन लेने गये हैं। आपको पता ही है कि हमारे देश में ट्यूशन के बिना बच्चे का पास होना सम्भव ही नहीं है। इसलिये बेचारे तिवारी जी बच्चों का भविष्य बनाने के लिये, जी जान से कोचिंग पढाने में लगे हुये हैं। अब मैं उन्हें आपके साथ कैसे भेजूं? चमचा जी भी कोचिंग की महिमा समझते थे। इसलिये बोले, कोई बात नहीं शर्मा जी। लेकिन क्या कोई भी टीचर खाली नहीं है, जो कि चल कर सम्मान ले सके ?

      शर्मा जी चिंता में पड़ गये। फि़र एका एक उनको याद आया ! उछलकर बोले, अरे खाली क्यों नहीं है। वो राम लाल जी हैं ना ! क्लास में बच्चों को पढा रहे हैं। पांचो कक्षाओं को अकेले संभाल रहे हैं। उनको ले जाइये। पढाने का क्या है ? मौका मिलेगा तो बाद में पढा लेंगे। वैसे भी जब से स्कूल में खिचड़ी मिलने लगी है, बच्चों का ध्यान खिचड़ी पर ज्यादा, पढाई पर कम है। चमचा जी खुश हो गये। भागे भागे कक्षा में गये, और राम लाल जी से बोले, मास्टर जी आपको मेरे साथ चलना है।

      रामलाल जी सकपकाकर बोले, क्यों भाई? हमने आपका क्या बिगाड़ा है? चमचा जी बोले, बात एसी है कि हमारे नेता जी आपका सम्मान करना चाहते हैं। इसलिये आपको मेरे साथ चलना होगा। रामलाल जी बोले, सम्मान करना है तो उसके लिये आपके साथ जाने की क्या जरूरत है? आपके नेता जी सम्मान क्या दुकान से खरीदकर देंगे, कि मैं लेकर आ जाऊंगा? वैसे भी हमारे बच्चे, जिन्हें मै पढा रहा हूं, ये भी तो मेरा सम्मान करते हैं। मैं उन्हें छोडकर अलग से सम्मान लेने क्यों जाऊं ? 

       चमचे को गुस्सा आ गया। बोला मास्टर ज्यादा बक बक मत करो। बच्चों के सम्मान और नेता जी के सम्मान देने में कोई फ़र्क ही नहीं है ? नौकरी करनी है कि नहीं? चलो मेरे साथ ! और चमचा रामलाल जी का हाथ पकड़कर घसीटते हुये मंच तक ले आया। जहां पर नेता जी शाल पकड़कर गुस्सा रहे थे। पहुंचते ही फ़टकार लगाई। क्यों भई दो कदम आने में कितनी देर लगती है? आपके पास कोई काम नहीं है तो क्या हमारे पास भी कोई काम नहीं है? मास्टर जी डर गये। और चुपचाप हाथ जोड़कर सम्मान ले लिये ......

 

Go Back



Comment

आपकी राय

remedial ivermectin 1.87 paste for humans
ciemna ivermectin covid 19
generic stromectol no prescription
- ivermectin pour on for goats
http://ivermectinwithoutdr.com/# - generic stromectol without prescription
melepaskan stromectol amazon

levitra without prescription

robbani stromectol cost
agnete stromectol injection
ivermectin tablet
- dosing for ivermectin (stromectol)
http://ivermectin-otc.com/# - ivermectin 12mg over the counter
serez side effects of stromectol

snakket side effects of ivermectin
shleton prescribing information for stromectol ivermectin
buy ivermectin 12mg
- ivermectin-pyrantel
http://ivermectin-6mg.com/# - buy stromectol 6 mg
grotesco Г  quelle frГ©quence peut-on prendre le stromectol

clomid for men

cialis vs viagra

whitecol generic stromectol
biroja durvet ivermectin pour on
ivermectin 3mg online
- ivermectin for cats
http://ivermectin3mg.com/# - ivermectin 3mg online
overweeg ivermectin (stromectol

450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc

हमसे संपर्क करें

visitor

619733

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...