Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

समस्या हैप्पी न्यू ईयर की .... (ब्यंग)

जब-जब नया साल आता है, मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जाती है। बात ही इतनी खतरनाक है। हैपी न्यू ईयर आता है और जेब को तरह-तरह से सैड कर जाता है। वैसे नया साल हो या साली, जेब पर दोनों ही भारी पड़ते हैं। नया साल केवल जेब ही नही काटता, बल्कि ढेर सारी परेशानियाँ भी बांटता है।

न्यू ईयर आते ही सबसे पहले जिस काम को करना हमारा राष्ट्रधर्म बन जाता है, वह है कैलेंडर बदलना। और कैलेंडर बदलना, बीबी बदलने की तरह ही बहुत साहसिक और कठिन कार्य है। हालांकि बिना बीवी की सहायता  के कैलेंडर को बदलना नामुमकिन है। जबकि कभी भी कैलेंडर ने, बीवी बदलने में कोई सहायता नहीं की।

     वैसे बदलने के काम में हमारे नेता हमेशा अव्वल रहते हैं। हर जगह के अनुसार, समय के अनुसार; अपने आप को बदलते रहते हैं। कहीं कुछ बोला, अगले पल खंडन। कहीं कुछ वादा किया, अगले पल भूल गये। कभी कोई प्रतिज्ञा की, फिर बदल गये। कभी पार्टी बदल दी, कभी चुनाव क्षेत्र बदल दिया। बारहमासी बदलने वाले जीव होते हैं। आखिर बुजुर्गो ने ही कहा है कि परिवर्तन ही जीवन है।

अब कैलेण्डर ठहरा निरा निर्जीव। खुद बदलता ही नहीं । और इस कैलेंडर परिवर्तन के पुनीत कार्य  में, बीवी से अधिक सहयोग कौन कर सकता है? क्योंकि बदलने के सभी अनुष्ठान वह बहुत ही लगन से कर सकती है। चाहे अपने कपड़े बदलना हों या गहने, अच्छे भले पर्दे बदलना हो या सजावट, पूरे घर को बदलने में वही माहिर होती  है।  

      इसलिए कैलेण्डर पर करीना कपूर की फोटो रहेगी या शाहरुख खान की, इसका सर्वाधिकार उन्हीं के अधीन होता है। हम केवल ईर्ष्या से शाहरुख खान तथा आमिर खान को देखते रह जाते हैं। आखिर नए साल का सवाल होता है, और नया साल बिना कैलेण्डर के कैसे आयेगा?

       दूसरी और गंभीर समस्या होती है मोबाइल मेसेज भेजने की। टेलीफोन विशिंग का फैशन अब पुराना हो चुका है। अब तो मोबाइल मैसेजिंग का जमाना है, और नए साल के  आगमन पर, पुरानी तकनीक का भला क्या काम? अब बच्चे भी ‘काम’की मोबाइल पर शूटिंग करके, एमएमएस भेजते हैं। एमएमएस भी ऐसा की पूरे देश को लगने लगता हैं कि न्यू ईयर क्या, न्यू मिलेनियम आ गया है और हम बाइसवीं शताब्दी के एडवांस युग मे पहुँच गए हैं।

मोबाइल मेसेज भेजने की समस्या, न्यू ईयर पर ही नहीं, हर ऐरे-गेरे मौके पर आती है। मोबाइल मेसेज भेजने की महामारी से हर ब्यक्ति पीड़ित है, तथा हर दिन, हर अवसर इसकी चपेट में है। शादी बयाह हो, मेसेज। बच्चा पैदा हो, तो मोबाइल मेसेज। बच्चा पहली बार रोये, हँसे तो मेसेज। पहली बार उठे-बैठे, तो मेसेज। खाना खाये तो हैपी ईटिंग, दूध पिये तो हैपी ड्रिंकिंग का मेसेज। पहली बार हजामत बनाए तो हैपी सेविंग का मेसेज।

तो न्यू ईयर बिना मोबाइल मेसेज के कैसे आयेगा? वैसे विद्वानों में मतभेद है कि कोई अवसर आने पर मोबाइल मेसेज भेजते हैं, या मोबाइल मेसेज भेजने पर अवसर  को आना पड़ता हैं? हालांकि मोबाइल मेसेज भेजते समय हमेशा यह सावधानी बरतनी पड़ती है की किसी से आए हुये मेसेज को कापी करके कहीं उसी को ना भेज दें, जिसने उसे भेजा था।

मोबाइल मेसेज के लिए गूगल बाबा से एकदम नया टाइप का मेसेज ढूँढना एक कठिन काम है। लोग मेसेज को कापी-पेस्ट करने में इतने माहिर हो गए हैं की सबको यह विश्वास होता है कि उसको आया मेसेज, भेजने वाले का ओरिजिनल नहीं बल्कि कापी-पेस्ट ही होगा। कभी-कभी तो पत्नियों द्वारा पतियों को भेजे गए अच्छे मेसेज पर, पति बेचारे यह सोच-सोच कर सैड हो जाते हैं कि आखिर उसको यह मेसेज किसने भेजा होगा?

    यद्यपि  हमारा देश, हैप्पी न्यू ईयर मनाने मे; बड़े-बड़े देशों को पीछे छोड़ चुका है, लेकिन अभी भी देश में कुछ ऐसे देशद्रोही बसते हैं, जिनको हमेशा रोटी-दाल की ही फिक्र रहती है। कुछ तो ऐसे भी है; जो न्यू ईयर पर बीयर पीने की बजाय ठंड से मर जाते हैं। और देश के नाम पर बट्टा लगा जाते हैं। कुछ नामुराद तो ऐसे भी हैं, जो कर्ज के बोझ से आत्महत्या कर लेते हैं।

     देश में बहुत से पढ़े-लिखे गँवार एसे भी हैं जो गौरक्षक दल या हिन्दू-युवा-वाहिनी में भर्ती होने के बजाय तनख्वाह वाला रोजगार माँग कर देश-द्रोह करने पर उतारू रहते हैं। कुछ ऐसे भी अनपढ़ गंवार हैं, जिनको पता ही नहीं की हैप्पी न्यू ईयर क्या होता है? ऐसे निकृष्ट लोग हैप्पी न्यू ईयर या सेम टू यू कहने की बजाय देश को ही शेम- शेम करवाने पर तुले हुये हैं।

       कुछ अज्ञानी तो यह भी पूछते हैं कि न्यू ईयर आने पर क्या सब कुछ हैप्पी हो जाएगा? क्या न्यू ईयर में देश की महँगाई, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी सब खत्म हो जाएगी? इन धृष्ट लोगों को यह भी नहीं मालूम है कि हैप्पी न्यू ईयर जैसे पावन-मनभावन मौके पर ऐसे बेहूदा सवाल नहीं पूछे जाते। इनको यह भी नहीं पता की इन समस्याओं से भी बड़ी समस्यायेँ हैं। और वो हैं, न्यू ईयर कैलेण्डर सेलेक्ट करने की समस्या, एमएमएस करने की समस्या, ग्रीटिंग कार्ड सेलेक्ट करने कि समस्या, बीयर का ब्राण्ड सेलेक्ट करने कि समस्या, न्यू ईयर मनाने के लिए मेनू और वेनू सेलेक्ट करने जैसी समस्याएं। जो कि गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार आदि से बहुत बड़ी हैं।

Go Back

Comment

450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d

हमसे संपर्क करें

visitor

263519

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...