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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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चन्द चेहरे जो तमतमाए हैं....

चन्द चेहरे जो, तमतमाए हैं।
आइने शाह को, दिखाये हैं।        (1)

साजिशें देखना, हवाओं की,
आंधियों में, दिये जलाए हैं।          (2)

संग हैं वो, सदा हुकूमत के,
वक्त को खूब, जो भुनाये हैं।        (3)

सिर्फ नारों में, वो चुनावों में,
चाँद तारे भी, तोड़ लाये हैं।          (4)

ओढ़कर देशभक्ति, की चादर,
स्याह करतूत ही, छुपाये हैं।        (5)

शोषितों के लिए, जुबां खोले,
नक्सली बस उन्हें, बताए हैं।        (6)

गैर से, क्या गिला, करे कोई,
ज़ख्म अपनों ने ही, लगाए हैं।      (7)

रो रहे हैं सभी, अपनी-अपनी,
किस्मतों के सभी, सताये हैं।       (8)

आशियाँने बचा ले, सब अपने,   
बादशा ने दिये, जलाए हैं।           (9)

दोस्त-दुश्मन, सभी समझते हैं,
बाल क्या धूप में, पकाए हैं।         (10)

बेगुनाही हुई, खता ‘जानी’,
कायदे ये नए, बनाए हैं।              (11)

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Badiya sir

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लाजवाब मनोजजी

Reply

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

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वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Reply

Behtreen andaj!!Ershad!!!

Reply

Very nice gazal bhaiya

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आपकी राय

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
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