Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

चन्द चेहरे जो तमतमाए हैं....

चन्द चेहरे जो, तमतमाए हैं।
आइने शाह को, दिखाये हैं।        (1)

साजिशें देखना, हवाओं की,
आंधियों में, दिये जलाए हैं।          (2)

संग हैं वो, सदा हुकूमत के,
वक्त को खूब, जो भुनाये हैं।        (3)

सिर्फ नारों में, वो चुनावों में,
चाँद तारे भी, तोड़ लाये हैं।          (4)

ओढ़कर देशभक्ति, की चादर,
स्याह करतूत ही, छुपाये हैं।        (5)

शोषितों के लिए, जुबां खोले,
नक्सली बस उन्हें, बताए हैं।        (6)

गैर से, क्या गिला, करे कोई,
ज़ख्म अपनों ने ही, लगाए हैं।      (7)

रो रहे हैं सभी, अपनी-अपनी,
किस्मतों के सभी, सताये हैं।       (8)

आशियाँने बचा ले, सब अपने,   
बादशा ने दिये, जलाए हैं।           (9)

दोस्त-दुश्मन, सभी समझते हैं,
बाल क्या धूप में, पकाए हैं।         (10)

बेगुनाही हुई, खता ‘जानी’,
कायदे ये नए, बनाए हैं।              (11)

Go Back



Comment

आपकी राय

बहुत ही सुंदर और सटीक व्यंग है

Very nice Explained by you the real Scenario of our Nation in such beautiful peom by Sh.Manoj Jani Sir. Hat's off to you.

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

अति सुन्दर

Very good

450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9

हमसे संपर्क करें

visitor

801169

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...