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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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बेचारा चाँद !!!

December 15, 2013
पूर्णिमा की
पूरी रात
सरोवर के
किनारे
बैठी – बैठी
वो
रूपसी
पानी में
अपनी और
चाँद की
छवि देख,
चाँद को
इस प्रकार
लजाती और
डराती रही
कि
बेचारा चाँद
सुबह
होते ही
मैदान छोड़ के
भाग गया ।

----त्रिलोक नाथ तिवाड़ी

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