Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

Blog posts : "ब्यंग्य "

वाग्वीर इंसान की, होत चीकनी बात !!

February 24, 2013

हमारा देश वाग्वीरों का देश है। हमारे देश में एक से बढ़कर एक वाग्वीर मौजूद हैं। सभी अपनी बातों से ही दुनिया फतह करते रहते हैं। इनके पास अत्याधुनिक ‘बयान बम’ पाये जाते हैं, जिसे वे हर अवसर पर फोड़ते रहते हैं। अपने बयान बमों की शक्ति बढ़ाने के लिए, हमारे वाग्वीर, उसमें ‘चैनल चर्चा’ के छर्रे मिलाते हैं, जि…

Read more

तरक्की हो रही है...

February 17, 2013

हमारा देश तरक्की की चक्की में, पिस रहा है। देश का विकास, आम आदमी को उदास कर रहा है। अब तो आम भी इतने महंगे होते जा रहे हैं कि कुछ दिन बाद लोग‘आम’आदमी होना भी अफोर्ड नहीं कर पायेंगे। जो आदमी मिलेंगे, वो बिना‘आम’ वाले आदमी होंगें। रोड के एक तरफ बड़े बड़े माल। तो दूसरी तरफ कटोरा पकड़े कंगाल। एक तरफ सरकार …

Read more

बनन में, बागन में, ... वेलेंटाइन !

February 13, 2013

ज्यों ज्यों वेलेंटाइन डे नजदीक आता है, नवयुवकों और नवयुवतियों की बांछे (वो शरीर में जहाँ भी पायी जाती हों) खिल जाती हैं। वैसे भी बसंत और फागुन का हमारे पूर्वजों ने भी बहुत नाजायज फायदा उठाया है। कभी पद्माकर जी ने बसंत के बारे में कहा था कि- “बीथिन में, ब्रज में, नेबोलिन में, बोलिन में, बनन में, बागन…

Read more

जांच अभी जारी है .......

October 28, 2012

जांच एक एसी प्रक्रिया है, जिससे दोषी पर कभी आंच नहीं आती। अफसर-नेता, घोटाले का करें नंगा नांच। जब जनता चिल्लाये, तो थमा देते हैं, जांच। और किसी दोषी पर कभी नहीं आती आंच। ये है पब्लिक उवाच। …

Read more

सेवा का मेवा .....

October 17, 2012

यूं तो हमारे सेवक राम जी में बचपन से ही समाज सेवा का कीड़ा कुलबुलाता था। लेकिन ज्यों ज्यों वह बड़े होते गए, समाज सेवा का कीड़ा भी बड़ा होता गया। छोटे थे तो लोगों से हजार दो हजार झटक कर उन्हें मोह माया के चंगुल से मुक्ति देते थे। थोड़ा बड़े हुये तो सरकारी चीजों को अपना समझकर अपनाते रहे। कभी सरकारी जमी…

Read more

जो तेरा है, वो मेरा है।

October 2, 2012

आजकल सब तरफ मोबाइल कंपनी का नारा, जो तेरा है वो मेरा है, खूब चल रहा है। गज़ब का अपनापन। गज़ब की सामाजिकता। एसा लगता है कि चारों ओर रामराज्य आ गया है। सभी लोग एक दूसरे के दुख सुख को अपना समझ रहे हैं। कभी हमारे मनीषियों ने वसुधैव कुटुम्बकम की बात की थी, आज उनके वंशज, “जो तेरा है वो मेरा है” अपना कर…

Read more

सम्मान एक शिक्षक का !

September 2, 2012

      हमारे महान देश में, गुरुओं की बहुत ही विकसित प्रजातियाँ पायी जाती हैं। गुरु-शिष्य परम्परा, शुद्ध देशी घी काल से डालडा काल तक बहुत ही संवृद्ध  रही है। वैसे हमारे देश की उर्वरा जमींन में, नाना प्रकार के गुरूओं की प्रजातियां पायी जाती हैं। कुछ गुरु विद्या मंदिरों  के आस पास लेक्चर देते हुये प…

Read more

हिन्दी पखवाड़ा सम्मेलन

September 2, 2012

जैसे शादी ब्याह का दिन नजदीक आते ही वर-कन्या के घर सजने लगते हैं, और शादी ब्याह के बाद सब पहले जैसा हो जाता है, उसी तरह सितंबर शुरू होते ही सभी सरकारी विभागों के राजभाषा विभाग के दफ्तर सजने- सँवरने और चहकने लगते हैं। जनवरी के हैप्पी न्यू ईयर तथा फरवरी के वेलेंटाइन डे के बाद सितंबर में जाकर पता चलता …

Read more

भीड़ की चिंता !! (व्यंग्य)

August 1, 2012

हमारे बुद्धिजीवी चिंतक जी परेशान हैं। न्यूज चैनलों के एंकर हलकान हैं। जिसे देखो चिंतित है। आखिर बात ही एसी है। अन्ना जी के आंदोलन में भीड़ नहीं आई। टीवी चैनलों पर स्वानाम धन्य बुद्धिजीवी देश की सबसे बड़ी समस्या पर ब्रेन स्टार्मिंग कर रहे है। समस्या ही इतनी विकराल है। आखिर अन्ना जी के आंदोलन में भी…

Read more

पड़ा अकाल बनाओ माल !!

July 26, 2012

कभी बुजुर्ग कहते थे कि भगवान जब देता है छप्पड़ फाड़ के देता है। अब जाकर उसका मतलब समझ में आया है। भगवान गरीबों का छप्पड़ फाड़ता है, तब अमीरों को देता है। कभी आपने सुना है कि भगवान जब देता है फ्लैट फाड़ के या फार्महाउस फाड़ के देता है? नहीं ना ! क्योंकि सूखा हो या बाढ़, छप्पड़ तो गरीबों का ही फटता है। आ…

Read more

भरो रिटर्न, रहो प्रसन्न !!

July 23, 2012

क्या आप कमाते हैं? क्या आप मेहनत करके कमाते हैं? आप सरकारी नौकरी करते हैं,? अगर इनमें से किसी का भी उत्तर हाँ हो, तो आपका पहला फर्ज बनता है कि आप सरकार को टैक्स दें और रिटर्न भरें। अन्यथा केवल पैसा कमाने से ही आप प्रसन्न नहीं रह पायेंगे। अगर आप अपना फर्ज नहीं निभायेँगे, तो सरकार आप को छोड़ेगी नही…

Read more

सर्टिफिकेट की महिमा

July 19, 2012

पैसे के बिना धनवान, ताकत के बिना बलवान और सर्टिफिकेट के बिना इंसान की कोई कीमत नहीं होती। एक अदद सर्टिफिकेट ही तो है, जो इंसान को इंसान की पहचान दिलाता है। हिन्दू हो या मुसलमान, बिना सर्टिफिकेट के नहीं कोई पहचान। सर्टिफिकेट की माया अपरंपार है। आम आदमी  तो आम आदमी, नेता, मंत्री या अफसर का काम भी,…

Read more

मईया मैं तो भारतरत्न ही लईहौं !!

July 11, 2012

नेतागीरी में पहचान की, फिल्मों में सलमान की, बेंचने के लिए दुकान की, सिर छुपाने के लिए मकान की, सीमा पर जवान की, जितनी जरूरत होती है, उतनीं ही जरूरत जिन्दगी में सम्मान की होती है। हर आदमी अन्दर ही अन्दर अपनी हैसियत के हिसाब से यही चाहता है कि उसे कोई ना कोई सम्मान अवश्य मिले। कुछ महान लोग होते …

Read more

13 Blog Posts