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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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Blog posts : "ब्यंग्य "

मुबारक नया साल। पुराने का नहीं मलाल।

आप सभी को नया साल 2017 बहुत बहुत मुबारक हो। आखिर आपने साल भर कड़ी मेहनत मशक्कत से देश को भ्रष्टाचार के ऊपरी पायदानों पर रोके रखा। इतने सारे उतार चढ़ावों के बावजूद किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में कोई कमी नहीं आने दिया। कालाधन - कालाधन करने वालों का मुँह काला कर दिया। हम  सभी ने इसके लिए जान लगा दिया। अब …

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कोई भी पाल्यूशन ! आड-ईवन साल्यूशन।

आम आदमी आजकल चूसा हुआ आम हो गया है। जिसे देखो उसे चूस चूस कर उसकी गुठली निकालने पर आमादा है। आम को पकाकर खाने के लिए जैसे कैल्सियम कार्बाइड लगाया जाता है, वैसे ही आम आदमी को प्रदूषित हवाओं से पकाकर चूसा जा रहा है। तरह तरह के पाल्यूशन से आम आदमी की हालत पके आम से भी बुरी हो गयी है। कहीं हवा का पाल्यू…

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सेवलान का धुला

धुलना और धोना हम भारतीयों का जन्मसिद्ध अधिकार है। धोने और धुलने की कला का आविष्कार हम भारतीयों ने ही किया है और उसपे हमलोगों का ही कापीराइट है। दुनिया के लोग तो पानी या पेट्रोल से सफाई करते हैं, पर हम भारतीय, पता नहीं किस किस चीज से दूसरों को धोते हैं, साफ करते हैं। पुराने जमाने में लोग सफाई के लिए …

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चलने भी दो यारों....

चलना और चलाना हमारे डीएनए में है। हम भारत के लोग, ‘सब चलता है’कहकर, कुछ भी चला सकते हैं। पप्पू नेता बन जाये, चलता है। फेंकू मंत्री बन जाये, चलता है। यहाँ तक कि नेता के बिना भी देश चला सकते हैं। अफसर के बिना आफिस चलता है। ड्राइवर के बिना गाड़ी चलती भी है और फुटपाथ पर भी चढ़ जाती है। हमारे न्यायालयों मे…

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बुलट की स्पीड....

हमारे नेताओं का बुलट और बैलेट प्रेम जग जाहिर है। खासकर हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री तो बुलेट के ख़ासे दीवाने हैं। मोदी जी ने जापानी प्रधानमंत्री आबे से कहा कि उनसे उन्हें बुलेट ट्रेन ही नहीं, ग्रोथ भी बुलट कि स्पीड से चाहिए। मोदीजी तो हर काम बुलट कि स्पीड से ही करते हैं। वो भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्…

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सर्वे का मारा, वोटर बेचारा !!

हे कलियुगी पाठकगणों, इस कलयुग में अगर कुछ सत्य है, तो वो है सिर्फ नेता और उनकी नेतागीरी। अभी-अभी बादामगिरी खाकर दिमाग पर ज़ोर दिया तो यह दर्शन समझ में आया, कि इस क्षणभंगुर संसार में नेता और नेतागीरी के अलावा, सारा जगत मिथ्या है। यह वोट मिथ्या है, वोटर मिथ्या है। जनता मिथ्या है, उसके मुद्दे मिथ्या हैं…

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जजन्त्रम्, ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

भारतवर्ष देशम् । नेता नरेशम् । खद्दर वेशम् । लूटन्ति देशम् । जनता की सेवम् । खिलाती है मेवम् । कमाई गरीबों की, चूसे पिशाचम् । सीएजी की जांचम् । सीबीआई की नाचम् । भ्रष्टों पे आती, नहीं कोई आंचम् । घोटाले से ज्यादा, ख़रच लेती जांचम् । घोटाले के आरोपी, बाइज्जत स्वतन्त्रम् । जजन्त्रम् ममन्त्रम्, गणतन्त्र…

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बच्चे कितने अच्छे???

आजकल देश पर बहुत भारी बिपदा आन पड़ी है। पूरा देश और हिन्दू धर्म खतरे में पड़ गया है। वैसे मुझ जैसे अज्ञानी को यह तो नहीं पता कि किस चीज से हिन्दू धर्म और देश को खतरा पैदा हो गया है? लेकिन अब बड़े बड़े ज्ञानी पुरुष कह रहे हैं कि देश और धर्म खतरे में है, तो है। इसपे सवाल थोड़े किया जा सकता है। तो आजकल हमार…

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बनो जुगाड़ू, लगाओ झाड़ू !!

झाड़ू और जुगाड़ू, हमारे देश की दो अनमोल धरोहरें हैं, जिन्हें हमारे पूर्वजों ने अथक प्रयास और जुगाड़ से ईजाद किया था। जुगाड़ू हमारे कठिन से कठिन कामों को चुटकियों में कर देता है और झाड़ू से घर की सफाई तो होती है, आजकल झाड़ू से राजनीति भी हो रही है। वैसे अगर देखा जाए तो आजकल की राजनीति, झाड़ू और जुगाड़ू के भर…

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बाढ़ मुबारक !!!!

हमारा देश एक त्योहारों का देश है। यहां जन्म होने पर बारहवीं से लेकर मरने तक की तेरहवीं के बींच नाना प्रकार के त्योहार मनाये जाते हैं। हर त्योहार या उत्सव के अवसर पर लोग एक दूसरे को बधाईंयां देते हैं । कभी जन्म दिन की बधाई तो कभी शादी की। कभी शादी के साल गिरह की बधाई तो कभी तलाक की । बधाई देने और लेन…

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लौट के बुद्धू घर को आए.......

बचपन से ही यह मुहावरा सुनते आ रहा हूँ कि,‘लौट के बुद्धू घर को आए’। लेकिन आजतक इसका मतलब समझ नहीं आया। पहले तो बुद्धू का मतलब बुद्धिमान होता है कि बेवकूफ, यह समझ नहीं आया। जैसे ‘अक़्लमंद’ का मतलब मंद अक्ल वाला या ज्यादा अक्ल वाला होता है, एक कन्फ़्यूजन है। अब अगर बुद्धू का मतलब, बेवकूफ माने, तो बुद्धिम…

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गर्व से कहो, हम नेता हैं.....

गर्व करना हमारे देश वासियों का जन्म सिद्ध अधिकार है। हमारी धरती कभी भी एसे गर्व वीरों से खाली नहीं रही। हमें हर काल और परिस्थिति में गर्व करने का हुनर आता है। या यूं कह सकते हैं की हम हर चीज में गर्वित होने का कारण खोज ही लेते हैं। कोई मर जाए तो इस बात पर गर्व कर लेते हैं कि मरने वाला भले ही भूंख से…

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दिल्ली के बन्दर... (ब्यंग्य)

विद्वान लोग कहते हैं कि हमारे पूर्वज बन्दर थे। यानी बन्दरों से पैदा हुआ है आदमी । विज्ञान में बाबा लेञ्ज ने बताया था कि जो चीज जहाँ से पैदा होती है, उसी का विरोध करती है। आजकल दिल्ली के लुटियन जोन से बन्दरों को भगाने के लिए लंगूरों की जगह आदमी लंगूरों की आवाज निकालकर बन्दरों को डराकर भगा रहे हैं।…

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सबहि नचावत – करत बगावत

पार्टी से बगावत करने वाला, कहलाता है बागी। कानून से बगावत करने वाला, होता है दागी। बगावत से आम आदमी की जिंदगी हो जाती है दूभर। नेता करें बगावत, तो उनकी किस्मत जाए सुधर। जिस पार्टी से निकले बागी। वो पार्टी हो जाती है अभागी। जिस पार्टी में मिले बागी। उस पार्टी की किस्मत जागी। कभी बुजुर्ग कहते थे कि- स…

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बागी नेता का इंटरव्यू

जैसा कि आप सभी जानते ही हैं, कि मैं भी अपने मुहल्ले का वर्ल्ड-फेमस पत्रकार हूँ, तो कभी-कभी मेरे अंदर का पत्रकारी कीड़ा कुलबुलाने लगता है। इसलिए कभी-कभार लोगों के छोटे-मोटे इंटरव्यू कर लेता हूँ। तो पेश है कई बागी नेताओं के इंटरव्यू के कुछ अंश। ये इंटरव्यू अलग-अलग नेताओं से अलग-अलग मौकों पर लिए गए हैं।…

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संतई-सेवकई-और सैफई

आजकल देश में नेताओं को संतई और सेवकई का दौरा पड़ा हुआ है। जिसे देखो संतगीरी या सेवकगीरी दिखा रहा है। चुनावी साल में जनता को अपनी सेवा और सादगी से लुभा रहा है। अभी तक संत धार्मिक काम करते थे। लेकिन जब से सन्त, आशाराम-गीरी करते हुये पकड़े जाने लगे हैं, तब से कुछ सन्त राजनीति में हाथ आजमाने लगे हैं। राजन…

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बीते का मलाल! मुबारक नया साल !!

आखिरकार एक और साल ने भी जनता से विदा ले ही लिया। नए साल में कुछ नया हो या ना हो, कुछ बदले या ना बदले, हम भारत के लोग कसम खाते हैं कि कैलेंडर जरूर बदल देंगे। हमारे लिए तो यही बदलाव “आप” के बदलाव से, लोकपाल के बदलाव से, बड़ा है। वैसे कैलेण्डर बदलना, देश बदलने से कठिन काम है। इस चिलचिलाती ठण्ड में कटरीन…

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इमला लिख!

अगर मगर मत कर। बकर बकर कर। इधर उधर देख। देश का चुनाव है। जनता का जमाव है। जातियों का प्रभाव है। आयोग का दबाव है। दबाव सह। जनप्रिय कुछ कह। मंच पर चढ़। भाषण पढ़। आरोप मढ़। आगे बढ़। भावना पढ़। कर इमोशनल चोट। मिलेगा वोट। क्या है खोट। बिछाले गोट। दादी को मत भूल। पापा को चढ़ा फूल। कर जतन। फेंकूँ बन। पप्पू मत बन…

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तलाश एक मुद्दे की !!

      शादी के लिये घोड़ी की, कील के लिये हथोड़ी की, टिकट के लिये सिफारिश की, फसल के लिये बारिश की, रज़ाई के साथ गद्दे की जितनी जरूरत होती है, उतनी जरूरत चुनाव जीतने के लिये  मुद्दे की होती है। तो आजकल सभी नेताओ को एक अदद मुद्दे की तलाश है। क्योंकि सभी को सत्ता की प्यास है। किसी को मंदिर की, तो किसी को …

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तारीख पे तारीख..

ज्यों ज्यों नजदीक आ रहा है चुनाव। जनता का बढ़ रहा है भाव। पाँच साल तक नेता जी दिखा रहे थे ताव। अब जनता के मुँह में भी जबान आ गयी, घोषित होते ही चुनाव। चुनाव की सरगर्मी में, टीवी चैनल –अख़बार कर रहे हैं कांव-कांव। जनता की राय जानने, दौड़ रहे हैं गाँव-गाँव। जगह जगह चुनाव सभाओं के मंच सज रहे हैं। एक से एक…

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20 blog posts

आपकी राय

Very nice 👍👍

Kya baat hai manoj Ji very nice mind blogging
Keep your moral always up

बहुत सुंदर है अभिव्यक्ति और कटाक्ष

अति सुंदर

व्यंग के माध्यम से बेहतरीन विश्लेषण!

Amazing article 👌👌

व्यंग का अभिप्राय बहुत ही मारक है। पढ़कर अनेक संदर्भ एक एक कर खुलने लगते हैं। बधाई जानी साहब....

Excellent analogy of the current state of affairs

#सत्यात्मक व #सत्यसार दर्शन

एकदम कटु सत्य लिखा है सर।

अति उत्तम🙏🙏

शानदार एवं सटीक

Niraj

अति उत्तम जानी जी।
बहुत ही सुंदर रचना रची आपने।

अति उत्तम रचना।🙏🙏

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...