Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है........

चाय के लिए जैसे टोस्ट होता है, वैसे हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है। कोई तोप की दलाली में, पैसे खाये। कोई कोयले की खान को, लूट ले जाए। कोई कामन वेल्थ में, भी  खेल दिखाये। कोई 2जी में चाहे, कनेक्शन लगाए। देश का मनी, चाहे वेस्ट होता है। पर हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है। कोई कफन का दलाल, कोई ताबूत का दलाल। कोई हेलीकाप्टर से भी, बना लेता माल। घोटालेबाजों के नाम, गिन-गिन के, भेजा रोस्ट होता है। पर हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है। … ये हमारा नया राष्ट्रगान है। जिसे हमारी पब्लिक और रिपब्लिक दोनों अनुमोदित कर चुके हैं।

आखिर पर्सेंटेज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। पैदा होने से लेकर मरने तक पर्सेंटेज हमारा पीछा नहीं छोड़ता। बच्चा पैदा होने पर सबसे पहले यह देखता है कि वह कितनी परसेंट वाली जाति में पैदा हुआ। स्कूल गया तो, जब तक पढ़ेगा, पर्सेंटेज पीछा नहीं छोड़ता। माँ-बाप बेटे के पर्सेंटेज के पीछे हलकान रहते हैं। पढ़-लिखकर जब बच्चा नौकरी ढूंदेगा, तो फिर पुंछा जाएगा, ग्रेजुएशन में कितना परसेंट? पोस्ट-ग्रेजुएशन में कितना परसेंट? और अंत में पुंछा जाएगा, कितने परसेंट वाली कास्ट से हो? नौकरी करो तो बीबी-बच्चों को हर महीने पर्सेंटेज। मरने के पहले सबका पर्सेंटेज निर्धारित करके मरो। मतलब पूरी जिंदगी, पर्सेंटेज कभी पीछा नहीं छोड़ता।

हमारे नेतृत्व कर्ताओं ने पर्सेंटेज की इस महिमा को समझा है। इसलिए इसका खूब इस्तेमाल करते हैं। जनता भी समझती है पर्सेंटेज की महिमा को। चिल्लाते तो केवल वो लोग हैं, जिन्हें पर्सेंटेज नहीं मिला या कम मिला। जिस चैनल वाले को पर्सेंटेज नहीं मिला, वही चिल्लाता है, देखो सरकार ने इस काम में इतना परसेंट लिया। बाकी तो निर्मल बाबा को दिखाकर ही पर्सेंटेज वसूल कर लेते हैं।

पर्सेंटेज की इस महिमा को देखकर सरकार ने पर्सेंटेज का भी सरकारीकरण कर दिया है। मतलब आम आदमी के लिए भी पर्सेंटेज का दरवाजा खोल दिया। अब पब्लिक को भी सीधे उसके अकाउंट में पब्लिक का पर्सेंटेज पहुँच जाएगा। बस पब्लिक को आधार कार्ड कि योग्यता रखनी होगी। पर्सेंटेज का आधार, सरकार तय करेगी, लेकिन पर्सेंटेज के लिए आधार जरूरी होता है। लेकिन जिस तरह विपक्ष इसका विरोध कर रहा है, उससे लगता है कि, उसे इस बात का मलाल है कि उसने अपने कार्यकाल में पब्लिक को पर्सेंटेज क्यों नहीं दिया।

वैसे भी, जब पब्लिक को अपना पर्सेंटेज, बिना काम-धंधे के मिल जाएगा, तो पब्लिक, चिल्लाएगी क्यों? पब्लिक बोलेगी, सरकार हर सौदे में तीस के बजाय पचास परसेंट कमीशन रख ले। लेकिन हमारा पर्सेंटेज टाइम से एकाउंट में पहुँच जाए। अगला चुनाव इसी मुद्दे पर होगा कि कौन पब्लिक को कितना पर्सेंटेज देगा? कुछ पार्टियाँ, पब्लिक को सौदों के पहले ही, एडवांस पर्सेंटेज देने का वादा कर सकती हैं। आनेवाले दिनों में यही नारा होगा कि, चाय के लिए, जैसे टोस्ट होता है। वैसे हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है। हर सौदे में परसेंटेज, जरूरी होता है।....

Go Back

Comment

450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972

हमसे संपर्क करें

visitor

263049

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...