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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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बनन में, बागन में, ... वेलेंटाइन !

ज्यों ज्यों वेलेंटाइन डे नजदीक आता है, नवयुवकों और नवयुवतियों की बांछे (वो शरीर में जहाँ भी पायी जाती हों) खिल जाती हैं। वैसे भी बसंत और फागुन का हमारे पूर्वजों ने भी बहुत नाजायज फायदा उठाया है। कभी पद्माकर जी ने बसंत के बारे में कहा था कि- “बीथिन में, ब्रज में, नेबोलिन में, बोलिन में, बनन में, बागन में, बगरों बसंत है”। लेकिन मेरे जैसा खूसट आदमी, आजकल जब अखबारों, न्यूज चैनलों को देखता है, तो बस प्यार के भूंखे भेड़िये हर शहर, हर गली मोहल्ले में धड़ल्ले से दिखते हैं। और मैं सोचता हूँ कि- ‘देश में, प्रदेश में, जिले में, मुहल्ले में, शहर में या गाँव में, नहीं सरकार है। यूपी में, एमपी में, पटना में, दिल्ली में, कश्मीर से केरल तक, सिर्फ बलात्कार है ?’

जब से हमारे देश ने उधारीकरण अपनाया है, बहुत से उधार के त्योहार भी अपना लिए है। अगर स्वदेशी अपनाने के चक्कर में बाबा रामदेव को सरकार ने घनचक्कर ना किया होता, तो मैं भी कहता कि, स्वदेशी फागुन और होली, वेलेंटाइन से ज्यादा अच्छा होता है। कहाँ तो महीने भर फागुन कि मस्ती, जिसमें ‘बाबा भी देवर लागे’ होता था, कहाँ एक दिन का वेलेंटाइन। और अगर वेल-इन-टाइम नहीं हुये, तो फिर एक साल का इंतजार। आखिर प्यार के इजहार के लिए भी नियत समय? ये तो मौका देखकर, चौका मारने की बात होती है, इसमें भी टाइम कि फिक्सिंग? सरासर ज्यादती है हमारे नवयुवकों के साथ।

हमारे देश में वेलेंटाइन का कम से कम इस बात के लिए तो विरोध होना ही चाहिए कि इसका टाइम फिक्स है। आखिर यह हमारी महान परंपरा के खिलाफ है। हमारे देश में, कोई भी प्रोजेक्ट हो, योजना हो, बांध हो, सड़क हो या पुल हो, कोर्ट का मुक़दमा हो, जब किसी भी काम के पूरा होने का समय कोई नहीं तय कर सकता, फिर प्यार का समय कैसे नियत हो सकता है? हम सब फ्लेक्सिबिल लोग हैं, हम लोगों के लिए वेलेंटाइन फिक्स नहीं होना चाहिए।

कहीं आपको एसा तो नहीं लग रहा कि मैं वेलेंटाइन का विरोध कर रहा हूँ, और आप मुझे कट्टरपंथी समझ रहे हों, या बैकवर्ड समझ रहे हैं, तो मैं आपको बता दूँ कि मैं तो केवल इतना चाहता हूँ कि वेलेंटाइन केवल एक दिन ना मनाकर, पूरे साल मनाना चाहिए। खासकर के संसद सत्रों में अगर राजनीतिक पार्टियाँ आपस में फूल देकर एक दूसरे से प्यार का इजहार करें तो संसद सत्र कितना सुचारु रूप से चलेगा। लेकिन हमारे देश में शायद लोग चाहते ही नहीं कि सब आपस में प्रेम करें। बेचारे सीबीआई के सरकारी वकील ए के सिंह ने, 2जी के आरोपियों से प्यार से बातचीत क्या कर ली, सीबीआई ने उन्हे हटा दिया, मीडिया ने चिल्ल-पों मचा दी। अच्छा तो मैं भी चलता हू फूल लेकर लाइन में खड़ा होता हूँ आपके लिए... 

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Comment

आपकी राय

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

वहुत अच्छी लगी

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...