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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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निंदक दिल्ली राखिए..............

निन्दा रस का मजा सोमरस से भी ज्यादा आता है। यह एक सर्व सुलभ, सर्व ब्यापी, महंगाई से परे, सर्व ग्राही चीज है। निन्दा का आविष्कार हमारे देश में कब हुआ, यह तो परम निंदनीय ब्यक्ति ही बता सकता है। लेकिन आजकल इसका प्रयोग हमारे परम आदरणीय लोग खूब कर रहे हैं।

पाकिस्तान ने हमारी सीमा में घुसकर हमारे पाँच सैनिकों की हत्या कर दी। भारत के परम पराक्रमी शूर वीरों ने दिल्ली की संसद में घोर निन्दा की। बारम्बार निन्दा की। इसी तरह चीनी सैनिक भी हमारी सीमा में घुस आए थे। लेकिन हमनें उन्हें भी नहीं बक्शा। हमने उनकी भी पानी पी-पी कर निन्दा की। क्या गज़ब की निन्दा की। बेचारे पाकिस्तानी और चीनी इस निन्दा से डरकर, पाकिस्तान और चीन का भारत में विलय करने की सिफ़ारिश कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, हमारी निन्दा मिशाइल से बाकी के देश भी इतने ज्यादा भयभीत हो गए हैं की अमेरिका भी एन्टी-निन्दा मिशाइल विकसित करने में लग गया है, क्योंकि उसे भारत के निन्दा मिशाइल जैसे आधुनिक और मारक अस्त्र के बारे में पता चल गया है। निन्दा मिशाईल को घर में बैठकर ही दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने पर दागा जा सकता है। किसी भी मौसम में, कभी भी, अपनी सुविधानुसार।

निन्दा मिशाइल, सभी मिशाइलों से ज्यादा मारक और परमाणु बम से भी ज्यादा घातक है। इसके इसी महत्व को देखते हुये हमारी सरकार ने, किसानों की भूमि का विधेयक या लोकपाल विधेयक भले ना पास किया हो, निन्दा प्रस्ताव बहुमत से एक क्षण में ही पास कर दिया।

कुछ अज्ञानी लोग तो यह भी कह रहे हैं कि सरकार ने हमारे सैनिकों के सिर काटने पर भी कुछ नहीं किया, इस पर सरकार कि निन्दा कि जानी चाहिए। शायद उन्हें पता ही नहीं कि निन्दा जैसे हथियारों का सरकार पर प्रयोग करना, आम आदमी को सीधे जेल भिजवा सकता है। वैसे भी निन्दा मिशाइल का प्रयोग सरकार का विशेषाधिकार है। और सरकार के पास पहले से ही, बहुत सी बातों के निन्दा प्रस्ताव पेंडिंग हैं।

अभी उसे विपक्ष कि निन्दा करनी है लोकपाल ना पास कराने के लिए। चुनाव आ रहा है, चुनाव आयोग की भी निन्दा करनी होगी, बन्दिशें लगाने के लिए। जनता की निन्दा करनी है, महँगाई और गिरते रुपये के लिए चिल्लाने के लिए। इतनी सारी परमावश्यक बातों को छोड़कर, अब सैनिकों के मरने पर कुछ करे। कह तो दिया सैनिक तो मरने के लिए ही होते हैं। कुछ ने उस कहने कि भी निन्दा कर दी। अब क्या सरकार कि जान लेंगे? मेरे जैसे तुच्छ कवि ने निन्दा के इस गुण को देखकर ही लिखा है कि:

निन्दक दिल्ली राखिए, संसद में बैठाय ।

बिन गोली-बंदूक के, दुश्मन देई उड़ाय ॥

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Comment

आपकी राय

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

वहुत अच्छी लगी

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...