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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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जो तेरा है, वो मेरा है।

आजकल सब तरफ मोबाइल कंपनी का नारा, जो तेरा है वो मेरा है, खूब चल रहा है। गज़ब का अपनापन। गज़ब की सामाजिकता। एसा लगता है कि चारों ओर रामराज्य आ गया है। सभी लोग एक दूसरे के दुख सुख को अपना समझ रहे हैं। कभी हमारे मनीषियों ने वसुधैव कुटुम्बकम की बात की थी, आज उनके वंशज, “जो तेरा है वो मेरा है” अपना कर, हमारी महान परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। क्या अमीर, क्या गरीब, क्या नेता, क्या जनता ! सब इसी परंपरा में डूबे हुए हैं; कि जो तेरा है वो मेरा है।

      देश के नेता और मंत्री, देश की संपदा को, जिस पर देश की जनता का हक है, खुलेआम बंदरबांट कर रहे हैं, लूट रहे हैं, और नारा बुलंद कर रहे हैं कि जो तेरा है वो मेरा है। जनता कहती है कि कोयला देश की सम्पत्ति है। उस पर जनता का हक है, तो मंत्री जी कहते है, जो तेरा है वो मेरा है। जो मेरा है वो तेरा है। अब जनता का क्या है, ये तो जनता ही जाने।

      हाँ विपक्ष जरूर चिल्ला रहा है कि यह तो सरकार ने घोटाला कर दिया है। सरकार ने संसाधनो की नीलामी नहीं किया। अपने लोगों को कोयले कि खानें बाँट दी। स्पेक्ट्रम बाँट दिया। तो सरकार का जवाब है, कि जो नीतियां आप लोगों ने अपनायी थी, वही हमने अपनायी है। जो प्रक्रिया आपने सरकार में रहकर अपनायी थी वही हम भी फालो कर रहे हैं। जो तेरा है वो मेरा है। जैसा आपने किया था, वैसा ही हमने भी किया है।

      सरकार ने देश में एफ़डीआई को मंजूरी दे दी। अब विदेशी कंपनियाँ हमारा पैसा कमाकर अपने यहाँ ले जाएंगी। हालांकि हमारे देश में बहुत से लोग पहले से ही मौजूद है, जो हमारे देश के पैसे को काला धन बना कर, देश से काली कमाई करके, देश का पैसा विदेशी बैंकों में भेजते रहे हैं और आज भी भेज रहे हैं। विदेशी कंपनियां अब हमारा पैसा अपने यहाँ ले जाएंगी, जब कि हमारे देश के लोगों का बस चले तो खुद ही लंदन- अमेरिका चलें जाएँ, और वहीं बस जाएँ। डाक्टर-इंजीनियर, नेता, जिसे देखो सभी अमेरीका को ही अपना देश मानते हैं, भारत से भागने पर उतारू रहते हैं। जो तेरा है वो मेरा है, जो मेरा है वो तेरा है, गाते रहते हैं।

     कांग्रेस जब विपक्ष में थी तो एफ़डीआई का विरोध किया। भाजपा जब सरकार में थी तो एफ़डीआई का समर्थन कर रही थी। अब कांग्रेस सरकार में है और समर्थक हो गयी, और भाजपा विपक्ष में है और विरोधी हो गयी है। जब मुलायम सिंह यादव विपक्ष मे थे, तो मायावती के पार्कों का, राजीव गांधी के कंप्यूटर और अंग्रेजी का विरोध करते थे। अब सत्ता के लिए टैबलेट और लैपटाप बाँट रहे हैं और खुद पार्क बनवाने लगे। इसी तरह सभी पार्टिया आज इधर (सरकार में) रहती हैं, तो कल उधर (विपक्ष में)। आज जो मुद्दा पक्ष वालों का होता है, वो कल विपक्ष वालों का होगा। गज़ब कि समझ। गज़ब का भाईचारा, सामाजिकता, कि जो तेरा है वो मेरा है।

      जो तेरा है वो मेरा है, केवल राजनीति तक ही नहीं है, बल्कि यह तो हर भारतीय के घर घर पायी और निभाई जाने वाली परंपरा है। शादी होने के बाद, बहू के मायके से मिले दहेज को सास अपना समझ कर ले लेती है, दहेज के सामान से बहू को दूर कर देती है, तो बहू भी सास के बेटे को अपना बनाकर, उसे सास से दूर कर देती है। बिलकुल जो तेरा है वो मेरा है कि तर्ज पर।

      जनता भी जो तेरा है वो मेरा है को पूरी तरह मानती है। सरकारी जमीन को कब्जा करना हो, सरकारी चीजों को अपना बनाना हो, तो उसका कोई जबाब नहीं। लोग ट्रेन से बल्ब, पंखे तक चुरा ले जाते हैं, कि जो सरकार का है वो उनका है। बिलकुल जो तेरा है वो मेरा है को मानते हुये।

      अगर कभी बीमार होकर कोई आदमी अस्पताल चला जाए, फिर तो डाक्टर उसकी कमाई को एसे चूसता है कि बीमार खुद यह कहने को मजबूर हो जाता है, कि जो मेरा है वो तेरा है, सबकुछ ले लो, अपना समझकर। 

 

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Comment

आपकी राय

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...