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मनोज जानी

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जो तेरा है, वो मेरा है।

October 2, 2012

आजकल सब तरफ मोबाइल कंपनी का नारा, जो तेरा है वो मेरा है, खूब चल रहा है। गज़ब का अपनापन। गज़ब की सामाजिकता। एसा लगता है कि चारों ओर रामराज्य आ गया है। सभी लोग एक दूसरे के दुख सुख को अपना समझ रहे हैं। कभी हमारे मनीषियों ने वसुधैव कुटुम्बकम की बात की थी, आज उनके वंशज, “जो तेरा है वो मेरा है” अपना कर, हमारी महान परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। क्या अमीर, क्या गरीब, क्या नेता, क्या जनता ! सब इसी परंपरा में डूबे हुए हैं; कि जो तेरा है वो मेरा है।

      देश के नेता और मंत्री, देश की संपदा को, जिस पर देश की जनता का हक है, खुलेआम बंदरबांट कर रहे हैं, लूट रहे हैं, और नारा बुलंद कर रहे हैं कि जो तेरा है वो मेरा है। जनता कहती है कि कोयला देश की सम्पत्ति है। उस पर जनता का हक है, तो मंत्री जी कहते है, जो तेरा है वो मेरा है। जो मेरा है वो तेरा है। अब जनता का क्या है, ये तो जनता ही जाने।

      हाँ विपक्ष जरूर चिल्ला रहा है कि यह तो सरकार ने घोटाला कर दिया है। सरकार ने संसाधनो की नीलामी नहीं किया। अपने लोगों को कोयले कि खानें बाँट दी। स्पेक्ट्रम बाँट दिया। तो सरकार का जवाब है, कि जो नीतियां आप लोगों ने अपनायी थी, वही हमने अपनायी है। जो प्रक्रिया आपने सरकार में रहकर अपनायी थी वही हम भी फालो कर रहे हैं। जो तेरा है वो मेरा है। जैसा आपने किया था, वैसा ही हमने भी किया है।

      सरकार ने देश में एफ़डीआई को मंजूरी दे दी। अब विदेशी कंपनियाँ हमारा पैसा कमाकर अपने यहाँ ले जाएंगी। हालांकि हमारे देश में बहुत से लोग पहले से ही मौजूद है, जो हमारे देश के पैसे को काला धन बना कर, देश से काली कमाई करके, देश का पैसा विदेशी बैंकों में भेजते रहे हैं और आज भी भेज रहे हैं। विदेशी कंपनियां अब हमारा पैसा अपने यहाँ ले जाएंगी, जब कि हमारे देश के लोगों का बस चले तो खुद ही लंदन- अमेरिका चलें जाएँ, और वहीं बस जाएँ। डाक्टर-इंजीनियर, नेता, जिसे देखो सभी अमेरीका को ही अपना देश मानते हैं, भारत से भागने पर उतारू रहते हैं। जो तेरा है वो मेरा है, जो मेरा है वो तेरा है, गाते रहते हैं।

     कांग्रेस जब विपक्ष में थी तो एफ़डीआई का विरोध किया। भाजपा जब सरकार में थी तो एफ़डीआई का समर्थन कर रही थी। अब कांग्रेस सरकार में है और समर्थक हो गयी, और भाजपा विपक्ष में है और विरोधी हो गयी है। जब मुलायम सिंह यादव विपक्ष मे थे, तो मायावती के पार्कों का, राजीव गांधी के कंप्यूटर और अंग्रेजी का विरोध करते थे। अब सत्ता के लिए टैबलेट और लैपटाप बाँट रहे हैं और खुद पार्क बनवाने लगे। इसी तरह सभी पार्टिया आज इधर (सरकार में) रहती हैं, तो कल उधर (विपक्ष में)। आज जो मुद्दा पक्ष वालों का होता है, वो कल विपक्ष वालों का होगा। गज़ब कि समझ। गज़ब का भाईचारा, सामाजिकता, कि जो तेरा है वो मेरा है।

      जो तेरा है वो मेरा है, केवल राजनीति तक ही नहीं है, बल्कि यह तो हर भारतीय के घर घर पायी और निभाई जाने वाली परंपरा है। शादी होने के बाद, बहू के मायके से मिले दहेज को सास अपना समझ कर ले लेती है, दहेज के सामान से बहू को दूर कर देती है, तो बहू भी सास के बेटे को अपना बनाकर, उसे सास से दूर कर देती है। बिलकुल जो तेरा है वो मेरा है कि तर्ज पर।

      जनता भी जो तेरा है वो मेरा है को पूरी तरह मानती है। सरकारी जमीन को कब्जा करना हो, सरकारी चीजों को अपना बनाना हो, तो उसका कोई जबाब नहीं। लोग ट्रेन से बल्ब, पंखे तक चुरा ले जाते हैं, कि जो सरकार का है वो उनका है। बिलकुल जो तेरा है वो मेरा है को मानते हुये।

      अगर कभी बीमार होकर कोई आदमी अस्पताल चला जाए, फिर तो डाक्टर उसकी कमाई को एसे चूसता है कि बीमार खुद यह कहने को मजबूर हो जाता है, कि जो मेरा है वो तेरा है, सबकुछ ले लो, अपना समझकर। 

 

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