Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

जनता उम्मीद से है........

December 25, 2016

हमारे देश में सबसे आसान काम अगर कोई है तो वो है, जनता में उम्मीद जगाना। जनता बस तैयार बैठी है उम्मीद लगाने के लिए। बस एक दो मुद्दे तबीयत से उछालो। दो चार बार गरीब- गरीबी, भ्रष्टाचार-घोटाले का जाप करिए, वंशवाद-तानाशाही को गाली दीजिये, कभी जनता के नाम पर टेसुए बहाइए, कभी विकास का घंटा बजाइए। बस फिर क्या? जनता उम्मीद से हो जाती है। पिछले सत्तर सालों से हर चुनाव में जनता को उम्मीद होती है। और चुनाव के कुछ दिन बाद ही उसकी उम्मीद की भ्रूण हत्या  हो जाती है।लेकिन हमारे भाग्य विधाता तब कोई और नई उम्मीद जगा देते हैं और जनता फिर उम्मीद से हो जाती है।

पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल ने 50 के दशक में चीन के साथ दोस्ती की उम्मीद, “हिन्दी-चीनी भाई भाई” कह कर जगाई। लेकिन हुआ उल्टा और हालत इतने खराब होते चले गए की भारत-चीन युद्ध भी हो गया और जनता की उम्मीद टूट गयी। फिर शास्त्री जी ने “जय-जवान, जय-किसान” कहकर देश के किसानों और जवानों में उम्मीद जगाई। लेकिन अब हालत ये हो गई है कि, एसा कोई दिन नहीं गुजरता जब कोई किसान आत्महत्या ना करे या कोई हप्ता नहीं गुजरता जब हमारा कोई जवान शहीद ना हो रहा हो।

फिर आई इन्दिरा जी, जिन्होने गरीबी हटाने की उम्मीद जगाई। और कांग्रेस ने गरीबी रेखा को 32 रुपये प्रतिदिन से घटाकर 25 रुपये करके रातों रात करोड़ों गरीबों को आँकड़ों में अमीर बना दिया। एक बार फिर जनता की उम्मीद टूटी। इन्दिरा को हटाकर, बाबा जय प्रकाश नारायण ने ‘संपूर्ण क्रांति, इन्दिरा हटाओ, देश बचाओ’ से जनता में उम्मीद जगाई। लेकिन इन्दिरा को हटाते हटाते खुद ही हट गए, बिखर गए और जनता की उम्मीद फिर टूट गयी। उसके बाद जनता को फिर उम्मीद हुई ‘अबकी बारी, अटल बिहारी’ से। लेकिन उन्होने जनता को इतना शाइनिंग कर दिया कि, जनता की उम्मीद टूट गयी।

फिर आई सोनिया गांधी। ‘कांग्रेस का हाथ। आम आदमी के साथ’। लेकिन कांग्रेस का हाथ रोज जनता के गाल पर पड़ने लगा। कभी टूजी, कभी कोयला कभी कोई और घोटाला। रोज "कांग्रेस का हाथ और तिजोरी साफ" होने लगी। जनता की उम्मीद एक बार फिर टूट गयी। लेकिन तब अन्ना की तमन्ना ने लोगों में फिर उम्मीद जगाई। जनता जन्तर-मन्तर पर फिर से उम्मीद मय हो गयी। लोकपाल पाने और भ्रष्टाचार मिटाने के सपने सजाने लगी। उसके सपनों को सच करने के लिए सपनों के सौदागर प्रकट हुये। ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ से उम्मीद जगाई  ‘हर हर मोदी। घर घर मोदी’ से उम्मीद जागी। महँगाई डायन को भगाने और रोजगार दिलाने के नाम पर जनता फिर उम्मीद से हो गयी। परंतु हमेशा की तरह जनता को  जल्दी ही अपनी उम्मीदों से भरोसा उठने लगा। लेकिन  जितनी जल्दी से मोदी जी उम्मीद तोड़ते हैं। उससे ज्यादा तेजी से उम्मीद पैदा करते हैं।

जब से मोदी जी आए हैं, जनता लगातार उम्मीद से है। पहले पंद्रह लाख पाने की उम्मीद थी। लेकिन उसे जुमला बताकर शाह ने तोड़ दिया तो मोदी जी ने रोजगार बढ़ाने और महँगाई घटाने का ख्वाब दिखाकर जनता को फिर से उम्मीद दिलाई। लेकिन खुद सरकार के आँकड़े ने जब ये बताया कि पिछले सात साल में सबसे कम रोजगार पैदा हुआ, और एड़ी चोटी का दम लगाने पर भी प्याज-टमाटर के दाम कम नहीं हुये तो, मोदी जी हर हफ्ते एक नई योजना लाकर लगातार उम्मीद जगा रहे हैं। सैकड़ों योजनायें आती रहीं, और लोग भूलते रहे, तो उन्होने नोटबंदी से सर्जिकल स्ट्राइक कर दी। 

सरकार का दावा है कि ये काले धन कुबेरों पर सर्जिकल स्ट्राइक है तो विपक्ष कहता है कि जनता पर सर्जिकल स्ट्राइक है। लेकिन इस बार जनता भयंकर उम्मीद से हुई और कष्ट सही। मंत्री जी ने कहा कि नोटबंदी का कष्ट, प्रसव पीड़ा जैसा सुखदाई कष्ट है। यानि अबकी बार जनता सही में उम्मीद से है। लेकिन जब फोर्ब्स ने बताया कि देश भ्रष्टाचार में नंबर वन हो गया, तो जनता की उम्मीद का गर्भपात हो गया। उसके बाद जीएसटी ने जनता को फिर उम्मीद से कर दिया। सब गारण्टी दे रहे थे कि अबकी बार तो विकास होगा ही। लेकिन हो गया ‘तैमूर’। वो भी करीना और सैफ के यहाँ। जनता तो पिछले सत्तर सालों से लगातार उम्मीद से ही है।

Go Back

Comment