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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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जजन्त्रम्, ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

भारतवर्ष देशम् । नेता नरेशम् । खद्दर वेशम् । लूटन्ति देशम् । जनता की सेवम् । खिलाती है मेवम् । कमाई गरीबों की, चूसे पिशाचम् । सीएजी की जांचम् । सीबीआई की नाचम् । भ्रष्टों पे आती, नहीं कोई आंचम् । घोटाले से ज्यादा, ख़रच लेती जांचम् । घोटाले के आरोपी, बाइज्जत स्वतन्त्रम् । जजन्त्रम् ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

संविधान शपथम् । भ्रष्टाचारे लथपथम् । सत्ता का दम्भम् । जनता नोचे खम्भम् । विधायक-सांसदम् । लूटत आनंदम् । पंचवर्ष जनता, करत क्रंदनम् । लालीपाप मुद्दम् । राजनीति शुद्धम् । जनता है बुद्धू, नेता हैं बुद्धम् । जनता की सेवा, जनता विरुद्धम् । सियासत का सर्वत्र, फैला षड़यन्त्रम् । जजन्त्रम् ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

विकासम् विकासम् , चतुर्दिक विकासम् । धरम-जाति मुद्दम् , मस्जिद विनाशम् । विकासम् विकासम् , चतुर्दिक विकासम् । चार चार बच्चे, कराते हैं पैदम् । खुद तो लिया है, सन्यासम् सन्यासम् । विकासम् विकासम्, चतुर्दिक विकासम् । धर्मांतरणम् , गोड़से सम्मानम् । भारत में गाँधी, विनाशम् विनाशम् । विकासम् विकासम्, चतुर्दिक विकासम्। सत्यम् है बैनम् , भ्रष्टम् स्वतन्त्रम् । जजन्त्रम् ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

संसद के अंदर, जूतम पैज़ारम् । मछली बाजारम् । चीखम् पुकारम् । माइकम् उखाड़म् । वस्त्रम् फाड़म् । आँकड़ा प्रदर्शनम् । खोखली विमर्शम् । भावुक मुद्दम् । सिर्फ वाक युद्धम् । अरबों- खरबों खर्चम् । सिर्फ छद्म चर्चम् । जनता निराशम् । देखत तमाशम् । नेतागीरी सारम् । नोटों का हारम् । देशभक्ति प्रचारम् । लोकतन्त्र सारम् । जनता उपेक्षित, कहते जनतन्त्रम् । जजन्त्रम् ममन्त्रम्, गणतन्त्रम् !!

राजनीति अखाड़म् । कागजी शेर दहाड़म् । सबका खेल बिगाड़म् । परस्पर खींचति नाड़म् । कुर्सी जुगाड़म् । खुद करो ऐश, दुनिया जाय भाड़म् । भड़काय दंगा, बस्ती उजाड़म् । राजनीति अखाड़म् । वोटम् जुगाड़म् । ‘गन’ हुआ हावी, नचाए है ‘तन्त्रम्’। जजन्त्रम् ममन्त्रम् गणतन्त्रम् !!

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आपकी राय

आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...