Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

घोटाला गारंटी योजना .......

सरकार इधर बहुतई परेशान है। कारण है ई मुई कैग और सीबीआई। इनसे बचे तो, पब्लिक का पी आई एल । उसके बाद कोर्ट का डंडा। कोई सरकार को चैन से बैठने नहीं देता। एसे मेँ सरकार देश का विकास कैसे करे? देश विकास कर रहा है तो कुछ अज्ञानी चिल्ला रहे हैं कि घोटाला हो रहा है। अरे भाई ये भी तो देखो, पहले देश कितना गरीब था, लाख दो लाख के घोटाले पर मंत्री पद छोड़ना पड़ता था। अब लाख करोड़ मेँ घोटाला होता है,बिना किसी को पद छोड़े,क्या ये विकास नहीं है?

लेकिन पब्लिक इतनी स्वार्थी है कि खुद तो केवल नाम लिखाकर, रोजगार गारंटी योजना मेँ, आधा प्रधान और सेक्रेटरी को देकर आधा बिना काम किए ले रही है। बिना काम-धाम किए सरकार पब्लिक को भरपेट भोजन की गारंटी दे रही है। लेकिन सरकार को काम कर के भी कुछ नहीं लेने देती। पब्लिक के घोटाले कि गारंटी,और सरकार करे तो गिल्टी। यह तो सरासर अन्याय है सरकार पर।

अब सरकार पहले देश के विकास कि योजनाएँ बनाए। योजनाओं की मोटी मोटी फाइलें बनाए।  उनपर अमल करके करोड़ों कमाए। (सरकार और सरकारी लोग, दोनों कमाएं) और जब देश का (साथ मेँ अपना भी) विकास हो जाए तो पब्लिक चिल्लाती है फाइल गायब है, फाइल गायब है। अरे भाई आपको विकास चाहिए या फाइल। लाखों फाइलें बाबुओं की मेज पर सालों से धूल फांक रही हैं, उन्हे कोई नहीं पूंछता। सबको बस कोयले की फाइलें चाहिए। अब कोयले की कालिख मेँ फाइलें नहीं दिख रहीं होंगी। लेकिन नहीं। सबको तो बस वही फाइलें चाहिए।

इसलिए मैं सोचता हूँ की सरकार को एक घोटाला गारंटी बिल भी इसी सत्र मेँ लाना चाहिए। जब पब्लिक के खाने की, बिना काम कमाने की गारंटी है, सरकार की भला क्यों नहीं? हाँ तो मेरा प्रोपोजल ये है कि सरकार को एक राष्ट्रीय घोटाला गारंटी कानून लाना चाहिए, जिसके दायरे मेँ सभी छोटे बड़े नेता आयें। हर नेता को उसके वोटबैंक के अनुपात मेँ घोटाला करने की छूट हो।

यानी जो सांसद हैं, उनका एरिया अधिक होता है, उन्हें अपने अपने परिवार के प्रति सदस्य 10 करोड़ रुपये प्रतिमाह के हिसाब से घोटाला करने की गारंटी हो। जो विधायक हैं, उन्हें अपने परिवार के प्रति सदस्य 5 करोड़ प्रतिमाह के हिसाब से घोटाला करने की गारंटी सरकार दे। परिवार के सदस्यों मेँ उस क्षेत्र की जनता को भी गिना जा सकता है। छुटभैये नेताओं को भी पार्टी से 10 परसेंट घोटाले की रकम मिलने की गारंटी होनी चाहिए।

घोटाला गारंटी योजना से देश को बहुत ही लाभ होंगे। मसलन फालतू की फाइलों के रख-रखाव का खर्च बचेगा। कैग –विजिलेन्स की जरूरत नहीं होगी। इससे ही करोड़ों बचेंगे। लोकयुक्त या सीबीआई की जरूरत नहीं होगी, जिससे की नेताओं की बीमारी पर खर्च कम आएगा, उनका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। पैसा बचेगा सो अलग। बाकी इस घोटाला गारंटी बिल के मसौदे मेँ जो कमियाँ होंगी, वह जब बिल पर चर्चा होगी, तो अनुभवी लोगों द्वारा दूर हो जाएंगी।

Go Back



Comment

आपकी राय

Hello there,

My name is Aly. Would you have any interest to have your website here at manojjohny.com promoted as a resource on our blog alychidesign.com ?

We are in the currently updating our do-follow broken link resources to include current and up to date resources for our readers.

If you may be interested please in being included as a resource on our blog, please let me know.

Thanks,
Aly

आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54

हमसे संपर्क करें

visitor

335642

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...