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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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इमला लिख!

अगर मगर मत कर। बकर बकर कर। इधर उधर देख। देश का चुनाव है। जनता का जमाव है। जातियों का प्रभाव है। आयोग का दबाव है। दबाव सह। जनप्रिय कुछ कह। मंच पर चढ़। भाषण पढ़। आरोप मढ़। आगे बढ़। भावना पढ़। कर इमोशनल चोट। मिलेगा वोट। क्या है खोट। बिछाले गोट। दादी को मत भूल। पापा को चढ़ा फूल। कर जतन। फेंकूँ बन। पप्पू मत बन। पंजा सँभाल। सब्सिडी निकाल। गरीबी हटा। गरीब मिटा। सोना खनन कर। पब्लिक मगन कर। महँगाई बढ़ा। पट्टी पढ़ा। सेकुलर दिख। इमला लिख।

डाल फूट। मचा लूट। कुछ ना जाये छूट। करले, जो करे सूट। कामधाम कर। तामझाम ना कर। खिला कमल। इतिहास बदल। तनिक संभल। बना स्वप्न महल। दिल बहला। पब्लिक फुसला। पंगा मत कर। दंगा मत कर। संभल संभल चल। कर नई पहल। हीरो बन। कीरो बन। चप्पू चला। पप्पू भगा। अलग दिख। लम्बा टिक। मन्दिर गरमा। पब्लिक भरमा। गड़बड़ मत कर। हड़बड़ मत कर। संघ का साथ। क्या करेगा हाथ। जनता को टोपी पहना। खुद टोपी मत पहन। विरोधी जाय नप। पटेल जप। सियासत सिख। इमला लिख।

सायकिल चढ़। आगे बढ़। पट्टी पढ़ा। दंगा बढ़ा। वादा कर। पूरा मत कर। झोली भर। वादा कर। मुस्लिम देख। माथा टेक। बाँट लैप टाप। करेगा टाप। ईमान बेंच। देश बेंच। चाय मत बेंच। भत्ता दे। सत्ता ले। हाथी हटा। पंजा पटा। लोहिया दिख। इमला लिख।

हाथी चढ़। साथी बढ़। पंजा पकड़। कमल जकड़। सायकिल से दूर। रह भरपूर। पारक बना। स्मारक बना। मूरत लगा। पब्लिक को दे दगा। कुछ मत कर। बस झोली भर। पब्लिक जाए मर। अपना घर भर। बना ले थीम। रट जय भीम। दलित जाप। कट जाए पाप। दलित दलित चिख। इमला लिख।

झाड़ू उठा। भ्रष्टाचार मिटा। अन्ना बुला। पब्लिक मिला। कर बड़बोल। सिंहासन जाए डोल। यमुना तट। लोकपाल रट। भ्रष्टों का खेल। तिहाड़ जेल। नेता पुश। पब्लिक खुश। नेतागीरी सिख। इमला लिख।  

पब्लिक सुन। कुछ तो गुन। नेता का जाल। करे बेहाल। खुद मालामाल। तुम कंगाल। छोड़ बवाल। कर कमाल। दागी छोड़। बागी छोड़। थोड़ा गुन। अच्छा चुन। देशभक्त बन। छोड़ लड़कपन। साल गए पचपन। अब तो जाग। जाति-धर्म त्याग। लीडर चुन। डीलर मत चुन। लोकतंत्र सिख। इमला लिख। 

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आपकी राय

आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...