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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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इमला लिख!

November 16, 2013

अगर मगर मत कर। बकर बकर कर। इधर उधर देख। देश का चुनाव है। जनता का जमाव है। जातियों का प्रभाव है। आयोग का दबाव है। दबाव सह। जनप्रिय कुछ कह। मंच पर चढ़। भाषण पढ़। आरोप मढ़। आगे बढ़। भावना पढ़। कर इमोशनल चोट। मिलेगा वोट। क्या है खोट। बिछाले गोट। दादी को मत भूल। पापा को चढ़ा फूल। कर जतन। फेंकूँ बन। पप्पू मत बन। पंजा सँभाल। सब्सिडी निकाल। गरीबी हटा। गरीब मिटा। सोना खनन कर। पब्लिक मगन कर। महँगाई बढ़ा। पट्टी पढ़ा। सेकुलर दिख। इमला लिख।

डाल फूट। मचा लूट। कुछ ना जाये छूट। करले, जो करे सूट। कामधाम कर। तामझाम ना कर। खिला कमल। इतिहास बदल। तनिक संभल। बना स्वप्न महल। दिल बहला। पब्लिक फुसला। पंगा मत कर। दंगा मत कर। संभल संभल चल। कर नई पहल। हीरो बन। कीरो बन। चप्पू चला। पप्पू भगा। अलग दिख। लम्बा टिक। मन्दिर गरमा। पब्लिक भरमा। गड़बड़ मत कर। हड़बड़ मत कर। संघ का साथ। क्या करेगा हाथ। जनता को टोपी पहना। खुद टोपी मत पहन। विरोधी जाय नप। पटेल जप। सियासत सिख। इमला लिख।

सायकिल चढ़। आगे बढ़। पट्टी पढ़ा। दंगा बढ़ा। वादा कर। पूरा मत कर। झोली भर। वादा कर। मुस्लिम देख। माथा टेक। बाँट लैप टाप। करेगा टाप। ईमान बेंच। देश बेंच। चाय मत बेंच। भत्ता दे। सत्ता ले। हाथी हटा। पंजा पटा। लोहिया दिख। इमला लिख।

हाथी चढ़। साथी बढ़। पंजा पकड़। कमल जकड़। सायकिल से दूर। रह भरपूर। पारक बना। स्मारक बना। मूरत लगा। पब्लिक को दे दगा। कुछ मत कर। बस झोली भर। पब्लिक जाए मर। अपना घर भर। बना ले थीम। रट जय भीम। दलित जाप। कट जाए पाप। दलित दलित चिख। इमला लिख।

झाड़ू उठा। भ्रष्टाचार मिटा। अन्ना बुला। पब्लिक मिला। कर बड़बोल। सिंहासन जाए डोल। यमुना तट। लोकपाल रट। भ्रष्टों का खेल। तिहाड़ जेल। नेता पुश। पब्लिक खुश। नेतागीरी सिख। इमला लिख।  

पब्लिक सुन। कुछ तो गुन। नेता का जाल। करे बेहाल। खुद मालामाल। तुम कंगाल। छोड़ बवाल। कर कमाल। दागी छोड़। बागी छोड़। थोड़ा गुन। अच्छा चुन। देशभक्त बन। छोड़ लड़कपन। साल गए पचपन। अब तो जाग। जाति-धर्म त्याग। लीडर चुन। डीलर मत चुन। लोकतंत्र सिख। इमला लिख। 

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डर मत | सुन मत | सुनने का नाटक कर | मन की कर |हाथी पंजा कमल साइकिल मत देख | आदमी देख |चल कर 'मत' कर | न पसंद आये तो 'कोई नही ' का ' मत' कर |इमला मत लिख | खुद लिख |

क्या बात है सीपी सर। लाजबाब !!



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