Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

है बहुत दुशवार जीना........

July 4, 2013

है बहुत दुशवार जीना, घर  के वीराने से,

जिंदगी  आबाद होती,  बस तेरे आने से !!

 

बस तुम्हारी ही खुशी है, इस जहां में बेहिसाब ,

नापकर, गम दूर करता, शाकी  पैमाने  से !!

 

जो नशा आंखो में तेरी, वो कहाँ है जाम में,

निकले हैं मायूस होके, हम तो मयखाने से !!

 

मंदिर-मस्जिद, काशी–काबा, जा के हमने देखा

पर सकूं मिलता नहीं है, दिल को भरमाने से !!

 

दिल, जिगर और खून के, कतरे कतरे में है जो,

                                    भूल सकता कैसे  है? ‘जानी’, वो भुलाने से !!

Go Back

Comment