Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

हर कीमत पर जो बिकने को...

हर कीमत पर जो बिकने को, बैठे हैं बाजारों में।
भ्रस्टाचार वो ढूंढ रहे हैं, औरों के किरदारों में। 

जिनको  हम समझे थे मांझीछोड़ दिये मंझधारों में  
आज कबीले के ही कातिशामिल हैं सरदारों में  

प्यार पे पहराघर-बाहर काकोर्ट-कचहरी थानों का, 
लव-जेहाद से, खाप से देखो, खौफ मचा दिलदारों में।  

उलझा देंगे जाति-धरम में, जब तक कुछ भी सोचेंगे,    
सारी दुनिया आके फँसी है, धरम-जाति हथियारों में।  

दंभघोटालेझूंठ आँकड़ेविज्ञापन में दावों से, 
खुद को ख़ुदा समझते ही हैं, रहते जो सरकारों में। 

ट्रेन-बाढ़ में, अस्पताल में, रोज ही पब्लिक मार रहे
मेरे मसीहा छुट्टी ले लोकम से कम इतवारों में  

हर भाषण में झूठे वादे, रोजी-रोटी के यारों,
दावे हुए खोखले इतनेयकीं नहीं अ नारों में।  

 सच कहें, सुने ना सच को, देखें और दिखाएं ना
चरणवन्दना बहुत हुई अब, खबर छपे अखबारों में।  

हे इंसाफ की देवी खोलो, अपनी आँख कि पट्टी तुम, 
सिर्फ तराजू क्या कर लेगा, जंग लगी तलवारों में।  

सच से होता खौफ़ हमेशासत्ता के गलियारों में। 
अब के तानाशाहों के हैं, नायक बस हत्यारों में। 

नेता-मीडिया-बिजनेसमैन का, ये गठजोड़ सलामत है, 
कौन कहेगा अब सच जानी’, सभी झुके दरबारों में। 

Go Back

Comment

आपकी राय

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

अति सुन्दर

Very good

हमेशा की तरह उच्च कोटि की लेखनी....बहुत गहराई से, बहुत अर्थपूर्ण ढंग से व्यंग्य के साथ रचना की प्रस्तुति!

Bahut khoob bhai👏👏👏👌💐

Aur hamesha prasangik rahega…..very well written

हर समय यही व्यंग्य चुनाव पर सटीक बैठता है ❤️❤️❤️

असली नेता वही, जो जनता को पसंद वही बात कही , करे वही जिसमें खुद की भलाई , खुद खाये मलाई, जनता को दे आश्वासन की दुहाई

450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d

हमसे संपर्क करें

visitor

682645

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...