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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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हम उनसे मुहब्बत का...

July 1, 2013

हम उनसे मुहब्बत का, इजहार ना कर पाए।
दिल में ही रही चाहत, एक बार ना कह पाए।

चाहा तो बहुत दिल का, हम हाल बताएंगे,
कोशिश भी किया लेकिन, हर बार ना कर पाए।

आँखें तो बोलती थी, भाषा वो प्यार वाली,
ना तो न कही लेकिन, इकरार ना कर पाए ।

दिल खोल ना पाए हम, देखा जो ज़माने को,
लड़ने को ज़माने से, तैयार ना कर पाए ।

हम उनके लिए बैठे, पलकों को बिछाए थे,
सबकी तो सुना, मेरा, एतबार ना कर पाए ।

दिल दे तो दिया हमने, एकतरफा मुहब्बत में,
दिल देकर दिल लेने का, ब्यापार ना कर पाए ।

दिल की ना सुनी `जानी', माना है ज़माने की,
वो भी तो ज़माने को, इनकार ना कर पाए ।

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