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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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हम उनको चाहते रहे, दिवानों की तरह.....

हम उनको चाहते रहे, दीवानों की तरह,

मिले हमेशा वो मुझसे, बेगानों की तरह

 

शम्मा की तरह जल के, ना कर पाये रोशनी,

जलकर भी हमने देखा, परवानों की तरह

 

अब प्यार-मुहब्बत से, यूं जलने लगा ये दिल,

अब प्यार की बातें भी लगे, तानों की तरह

 

जज़्बात, वफ़ा, प्यार, मेरे दिल में रह गए,

निकले नहीं, जो मेरे, अरमानों की तरह

 

दिल की कहें जो बात तो, तो रुसवाई है ‘जानी’,

चुप रहना, सीख ही लिया, सयानों की तरह

 

हम उनको चाहते रहे, दीवानों की तरह,

मिले हमेशा वो मुझसे, बेगानों की तरह

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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