Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

जताते नहीं हैं लोग ......

दिल में है किसके क्या? ये जताते नहीं हैं लोग !
होंठों  पे दिल की बात भी,  लाते नहीं हैं लोग !

खुद कुछ ना करें, सबकुछ भगवान से चाहें,
सिर सामने यूं ही तो, झुकाते नहीं हैं लोग !!

पलभर में कष्ट दूर हो, मेहनत ना करनी हो,
बाबा को दान यूं ही,  चढ़ाते नहीं हैं लोग !!

अब दान-धर्म केवल, अवतार को, बाबा को ,
भूखे को तो पानी भी, पिलाते नहीं हैं लोग!!

सुनते नहीं हैं बात जो,  लालच में,  स्वार्थ में,
कहते हैं फिर वो, सच को, बताते नहीं हैं लोग !!

मेहनत, ईमानदारी से, दुशवार  है  जीना,
अब भ्रष्ट, बेईमां को, सताते नहीं हैं लोग !

दर्पण की झाड़–पोंछ में,  बीते तमाम उम्र,
चेहरे की अपने धूल, हटाते नहीं हैं  लोग !

लगते  गले  हैं,  हाथ  मिलाते  तपाक  से,
पर भूलकर भी दिल को, मिलाते नहीं हैं लोग !!

देते हैं दिल  को दर्द,  हाल ‘उनका’ पूँछकर,
उस पर भी कहते‘जानी’, सताते नहीं हैं लोग

Go Back

Comment

आपकी राय

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

अति सुन्दर

Very good

हमेशा की तरह उच्च कोटि की लेखनी....बहुत गहराई से, बहुत अर्थपूर्ण ढंग से व्यंग्य के साथ रचना की प्रस्तुति!

Bahut khoob bhai👏👏👏👌💐

Aur hamesha prasangik rahega…..very well written

हर समय यही व्यंग्य चुनाव पर सटीक बैठता है ❤️❤️❤️

असली नेता वही, जो जनता को पसंद वही बात कही , करे वही जिसमें खुद की भलाई , खुद खाये मलाई, जनता को दे आश्वासन की दुहाई

450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e

हमसे संपर्क करें

visitor

682684

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...