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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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Blog posts : "कविता"

कैसे हम गणतन्त्र मनायें????

 

कैसे हम गणतन्त्र मनायें? कैसे हम गणतन्त्र मनायें?

संविधान की, लाज नहीं है
गांधी,नेहरू, आज नहीं हैं
जनता का भी, राज नहीं है…

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........... मजबूर क्यों हुये ??

सोते से लोग, जगने को, मजबूर क्यों हुये
सत्ता के मद में, नेता सब, चूर क्यों हुये ??

जनता को आज अनशन का, अधिकार क्यों नहीं

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संसद की कार्रवाई.........

भाषण से मिलता है राशन, भाषण से रोजगार
भाषण सुन सुन करके जनता, सहती अत्याचार

आरोप-आंकड़ो में फँसकरके, घनचक्कर है जनता…

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.... फिर भी हम चुप रहते हैं।

लावा दिल में फूट रहा है,
बांध सब्र का टूट रहा है
देश को नेता लूट रहा है
साथ सत्य का छूट रहा है

पर आँख बंद किए रहते है।

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देश की चिंता में, घुल रहे हैं हम!!

देश की चिंता में, घुल रहे हैं हम!!
हर तरफ बह रही गंगोत्री भ्रष्टाचार की है
बड़े ही शान से बहती गंगा में, हाथ धुल रहे हैं हम।…

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थप्पड़ की गूंज देश में.......

थप्पड़ की गूंज देश में, हलचल मचाएगी।
सोते हुये लोगों को, शायद जगाएगी।

सरकार गर जनता को, एकदम भुलाएगी।
पाँच साल तक जनता , कहाँ जाएगी ?…

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कैसा होगा नया साल?????

कैसा होगा नया साल यह, कैसा होगा नया साल?

 जैसा भी हो नया साल,पर सबको  मेरी बधाई
सदा आपके आंगन बाजे,  खुशियों की शहनाई

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काश! चुनाव हमेशा हो...

कितनी खुशियां मिल जाती है
जब चुनाव-दुल्हानियाँ आती है
माहौल गरम हो जाता है
इतना दहेज ये लाती है ॥

जातिवाद और कटुता का, खतम तनाव हमेशा हो…

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भारत के भाग्य विधाता बोलो.....

भूंख,  गरीबी, भ्रष्टाचार को, घुट-घुट कर यूं, सहना है?
भारत के भाग्य विधाता बोलो, कबतक यूं चुप रहना है?

महंगाई में पिसकर अब तो,…

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9 Blog Posts

आपकी राय

आज का ज्वलन्त मुद्दा गाय, गोबर, गोमूइ राम मंदिर हिन्दू खतरे में हैं ये सब देशभक्त नहीं हो सकते हैं जिनको बेरोजगारी किसान मजदूर की चिंता है।

आदरणीय श्री सुप्रभात। ज्वलंत मुद्दों को सालिनता से सबों के समक्ष परोसने में माहिर आपके लेखन और लेखनी को कोटि कोटि नमन है। बहुत ही बढ़िया लेख।

आजकल के हालात पर करारा तमाचा काश सारी जनता समझ सके

बहुत बढ़िया।

क्या किया जाए सर।।
UPSC आप बिना अंग्रेजी पास नही कर सकते, कोर्ट HC and SC की सरकारी भाषा अंग्रेजी है, ट्रैन के ac में बैठकर आप अंग्रेजी न बोलो तो लोग जाहिल समझते है और उससे भी बड़ी बात यदि किसी पर हिंदी में गुस्सा उतार दिए तो गाली देगा अंग्रेजी में उतार दिए तो चुपचाप सुन लेगा , डर जाएगा।।
ऐसी स्थिति में हिंदी का राष्ट्रव्यापी होना मुश्किल है, पर राजभाषा है तो वार्षिक ही सही जश्न मनाना बनता है।।
हिंदी के प्रोत्साहन कार्यक्रम पर आप इनाम की रकम और मिठाई का डब्बा हटा कर देखिये कैसे भाग लेने वाले अधिकारियों कर्मचारियों में कमी आएगी।।
फिर भी मुबारक आपने इस ओर ध्यान दिया।।

चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत हिंदी पखवाणा के लिए चरितार्थ हो रही है नाम मातृभाषा है उसके प्रचार प्रसार के लिए इतना कुछ करना पडता है । अफसोस??

महान व्यंग्य महान सेवक की पहचान बताने के लिए

बहुत ही बेहतरीन समकालीन व्यंग्य आदरणीय

लाजवाब मनोजजी

Manoj Jani bolta bahi jo he sahi soach ka badsah jani

वाह! साहेब जी, खूबसूरत ग़ज़ल बनाये हैं।

Behtreen andaj!!Ershad!!!

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...