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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

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Blog posts : "कविता"

दर्द होता रहा, छटपटाटे रहे.....

August 18, 2017

दर्द होता रहा, छटपटाटे रहे, 
भ्रष्ट सिस्टम से हम, चोट खाते रहे.

फूल जन्माष्टमी पर, चढ़ाये बहुत, 
फूल गुलशन के बस, मुरझाते रहे.…

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वो चिंता पे चिंता, किये जा रहे हैं।

July 16, 2016

वो चिंता पे चिंता, किये जा रहे हैं।
हम उनके भरोसे, जिये जा रहे हैं।

 

महंगाई पे चिंता, बेगारी पे चिंता,
वो चिंता बराबर, किये जा रहे हैं।…

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बढ़िया है...

November 17, 2015

बढ़िया है...बढ़िया है...
तेरे नेता देश लूटते, देश भक्त बस मेरे नेता,
सबके अपने चश्मे हैं, सबका अलग नजरिया है। 
बढ़िया है...

 

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वीर सपूत

October 28, 2015

होली, ईद, दिवाली बस, मनती है जज़्बातों में

हम चैन की नींद तभी सोते हैं, जब जागते हैं वो रातों में।

 

ठंडी, गर्मी या बारिश हो, जो लड़ते हर हालातों …

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यह कैसा है लोकतन्त्र ?

August 12, 2014

यह कैसा है लोकतन्त्र?

कैसा यह जनता का राज

सहमी-सहमी जनता सारी

कैसा है ये देश आजाद ?

          जनमों के दुश्मन कुर्सी हित…

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बारी -बारी देश को लूटें ..........

April 25, 2014

बारी -बारी  देश  को  लूटें, बनी रहे  अपनी  जोड़ी।

तू हमरे जीजा के छोड़ा, हम तोहरे जीजा के छोड़ी।

 

एक सांपनाथ एक नागनाथ, एक अम्बेदकर लोहियावादी,…

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हिन्दी पखवाड़ा .......

September 9, 2013

हिन्दुस्तान में हिन्दी का, आज हो रहा  यह  सम्मान

हिन्दी पखवाडे के अलावा, हिन्दी कभी ना आये ध्यान

 

भाषण में हम कहते, ‘हिन्दी, बहुत सुबोध, सरल है…

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किसे चाहिए वैरागी ? हर दल मांगे, केवल दागी

August 3, 2013

किसे चाहिए वैरागी ? हर दल मांगे, केवल दागी। 
जिसके पास है पैसा-पावर, जनता उसके पीछे भागी।

जाति-धर्म-धन जनता देखे, और नहीं कुछ जाँचें, …

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बटला काण्ड पर रोईं सोनिया

July 25, 2013

       बटला पे रोई सोनिया, ये एहसान बहुत है।

      शायद चुनाव क्षेत्र में, मुसलमान बहुत हैं।

 

              बरसों पुराने जख्म, चुनावों में कुरेदो…

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हालात कुछ एसे बनाए जा रहे हैं ।

July 4, 2013

हालात कुछ एसे बनाए जा रहे हैं ।

कटघरे में राम लाये जा रहे हैं ।

       

ईमान जिसमें बाकी है, शूली  पे वो चढ़ेगा

कर्तव्यनिष्ठ या देशभक्त…

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बोस-भगत सा वीर चाहिए.......

July 4, 2013

तम दूर देश का करने को

भेद, बींच का,  हरने  को

देश प्रकाशित,  करने को

मातृ-भूमि हित, मरने को

 

            धरा समान,  धीर  चाहिए…

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आदमी चाँद पर ----

July 4, 2013

अम्बर के आंसू सूख गये

तारो ने हंसना बंद किया

पुष्प गंध प्रेमी उधौ  ने

अब तो बारूदी गंध पिया

            कलियों  ने घुंघट तोड दिये…

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धर्म बनाम जाति..............

July 4, 2013

वतन हिन्द था बहुत सुहावन।  बहत जहा गंगा जल पावन ॥

जाति  धर्म की  चर्चा  नाहीं।  ईर्ष्या, द्वेष ना भारत माहीं ॥

मिलि जुलि रहई इं…

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बीमार को अब जहर, पिला क्यों नहीं देते?

July 4, 2013

छिपकर  के दुश्मनों से,  कब तक रहोगे घर में

कुछ हम भी हैं  दुनिया को, दिखा क्यो नहीं देते

बीमार को अब जहर,  पिला क्यों नहीं देते?  …

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जनसंख्या वृद्धि

July 4, 2013

नहीं खाद पानी, न उपजाऊ मिट्टी

पौधे- पे- पौधे,  लगा क्यूँ  रहे हो?

न आंधी पे काबू, न बरखा पे काबू

सरस को कंटीला, बना क्यूं रहे हो?…

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यह कैसा है लोकतन्त्र????

July 4, 2013

यह  कैसा  है  लोकतन्त्र?

कैसा यह जनता का राज

सहमी-सहमी जनता सारी

कैसा है ये देश आजाद ?

 

           जनमों के दुश्मन कुर्सी हित…

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........... मजबूर क्यों हुये ??

July 4, 2013

सोते से लोग, जगने को, मजबूर क्यों हुये

सत्ता के मद में, नेता सब, चूर क्यों हुये ??

 

जनता को आज अनशन का, अधिकार क्यों नहीं…

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संसद की कार्रवाई.........

July 4, 2013

भाषण से मिलता है राशन, भाषण से रोजगार

भाषण सुन सुन करके जनता, सहती अत्याचार

 

आरोप-आंकड़ो में फँसकरके, घनचक्कर है जनता…

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.... फिर भी हम चुप रहते हैं।

July 4, 2013

लावा दिल में फूट रहा है,

बांध सब्र का टूट रहा है

देश को नेता लूट रहा है

साथ सत्य का छूट रहा है

पर आँख बंद किए रहते है।

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देश की चिंता में, घुल रहे हैं हम!!

July 4, 2013

देश की चिंता में, घुल रहे हैं हम!!

हर तरफ बह रही गंगोत्री भ्रष्टाचार की है

बड़े ही शान से बहती गंगा में, हाथ धुल रहे हैं हम।…

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