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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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बढ़िया है...

बढ़िया है...बढ़िया है...
तेरे नेता देश लूटते, देश भक्त बस मेरे नेता,
सबके अपने चश्मे हैं, सबका अलग नजरिया है। 
बढ़िया है...

 

बन्दर की सब उछल-कूद पर, एश मदारी काट रहे,
नेता आज मदारी हैं, जनता हुई बंदरिया है,,
बढ़िया है...

 

देश साफ कर भरें तिजोरी, 'जानी' अपनी कूबत भर,
सबकी अपनी गंगा हैं, सबकी अपनी दरिया है...
बढ़िया है... ... बढ़िया है...

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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