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मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

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थप्पड़ की गूंज देश में.......

थप्पड़ की गूंज देश में, हलचल मचाएगी।

सोते हुये लोगों को, शायद जगाएगी।

 

सरकार गर जनता को, एकदम भुलाएगी।

पाँच साल तक जनता , कहाँ जाएगी ?

 

सरकार का हाथ जनता पर, कबतक खाएगी।

मजबूर होके एक दिन, वो भी हाथ उठाएगी।

 

फिर सबको लोकतन्त्र की, खूब याद आएगी ।

लेकिन ये थप्पड़ संस्कृत, क्या ले के आएगी ?

 

महंगाई,भ्रष्टाचार से, क्या राहत दिलाएगी ?

या जनता को हर मुद्दे से, भटका ले जाएगी?

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आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

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चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

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आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...