Menu

मनोज जानी

बोलो वही, जो हो सही ! दिल की बात, ना रहे अनकही !!

header photo

कविताओं की सूची

कविता

पहली शिक्षक सावित्री माई...

शिक्षा देने की खातिर भी,

जिसने लड़ी लड़ाई 

शिक्षा की देवी, पहली, 

शिक्षक, सावित्री माई  
 

भेदभाव और शोषण की, 

जब लटकी थी तल…

Read more

सावित्री माई गीत

श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे हम

आज सावित्री माई को।

अंधकार अज्ञान मिटाने

लेकर चली पढ़ाई को।
 

सहा बहुत अपमान उपेक्षा

Read more

शिक्षा हमें समान चाहिए…

ना कोई एहसान चाहिए, अपना हक सम्मान चाहिए,

शिक्षा हमें समान चाहिए, शिक्षा हमें समान चाहिए।
 

डेस्क बेंच पर एक पढ़े और दूजा रद्दी, टाट पर।…

Read more

रावण की औलादें हैं जो........

नफरत हिंसा फैला कर जो, देशद्रोह का काम कर रही।
रावण की औलादें हैं जो, राम को बस बदनाम कर रही।

जय श्रीराम बोलकर जब, मुस्लिम की लाश बिछाता है।…

Read more

हे भारत के बहुजन बोलो..............

भेदभाव, अन्याय, उपेक्षा, कब तक यूं ही सहना है?

हे भारत के बहुजन बोलो, कब तक यूं चुप रहना है?

 

बहुजन को दास बनाने हित, ब्राह्मण ने वेद-पुराण रचा।…

Read more

हम भी लूटें, तुम भी लूटो.........

हम भी लूटें, तुम भी लूटो, लूटने की आजादी है।
सबसे ज्यादा वो लूटेगा, जिसके तन पर खादी है।

मंदिर-मस्जिद उलझाओ, लाखों के वादे फेंको,…

Read more

फिर से इलेक्शन आ रहे है।

फिर से.........
इलेक्शन आ रहे हैं।

जिन अछूतों को कभी,
मानव नहीं समझा गया।
कुम्भ में उन भंगियों के, 
पाँव धोये जा रहे हैं। …

Read more

बढ़िया है... भई...बढ़िया है...

बढ़िया है... भई...बढ़िया है...

तेरे नेता देश लूटते, देश भक्त मेरे नेता,
सबका अपने नेताओं के, बारे अलग नजरिया है। 
बढ़िया है...भई... बढ़िया ह…

Read more

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो...

हम रामराज्य ले आएँगे, हमपे केवल एतबार करो

तुम पब्लिक हो, इंतजार करो.....

तुम भोली- भाली जनता हो, भारत में तुम्हारा ख…

Read more

करेक्टर वाली गाय.......

गरीबी से परेशान,
था एक किसान।
न पैसे, न बेंचने को,
था कोई सामान।

दो गायें थी उसकी,
कुल जमा पूंजी।
इनके सिवा संपत्ति,

Read more

View older posts »

कैसी लगी रचना आपको ? जरूर बताइये ।

There are currently no blog comments.

आपकी राय

एकदम सटीक और relevant व्यंग, बढ़िया है भाई बढ़िया है,
आपकी लेखनी को salute भाई

Kya baat hai manoj ji aap ke vyang bahut he satik rehata hai bas aise he likhate rahiye

हम अपने देश की हालात क्या कहें साहब

आँखो में नींद और रजाई का साथ है फ़िर भी,
पढ़ने लगा तो पढ़ता बहुत देर तक रहा.

आप का लेख बहुत अच्छा है

Zakhm Abhi taaja hai.......

अति सुंदर।

अति सुन्दर

Very good

हमेशा की तरह उच्च कोटि की लेखनी....बहुत गहराई से, बहुत अर्थपूर्ण ढंग से व्यंग्य के साथ रचना की प्रस्तुति!

Bahut khoob bhai👏👏👏👌💐

Aur hamesha prasangik rahega…..very well written

हर समय यही व्यंग्य चुनाव पर सटीक बैठता है ❤️❤️❤️

असली नेता वही, जो जनता को पसंद वही बात कही , करे वही जिसमें खुद की भलाई , खुद खाये मलाई, जनता को दे आश्वासन की दुहाई

450;460;f702a57987d2703f36c19337ab5d4f85ef669a6c450;460;69ba214dba0ee05d3bb3456eb511fab4d459f801450;460;cb4ea59cca920f73886f27e5f6175cf9099a8659450;460;f8dbb37cec00a202ae0f7f571f35ee212e845e39450;460;1b829655f614f3477e3f1b31d4a0a0aeda9b60a7450;460;7bdba1a6e54914e7e1367fd58ca4511352dab279450;460;946fecccc8f6992688f7ecf7f97ebcd21f308afc450;460;dc09453adaf94a231d63b53fb595663f60a40ea6450;460;6b3b0d2a9b5fdc3dc08dcf3057128cb798e69dd9450;460;427a1b1844a446301fe570378039629456569db9450;460;7329d62233309fc3aa69876055d016685139605c450;460;eca37ff7fb507eafa52fb286f59e7d6d6571f0d3450;460;60c0dbc42c3bec9a638f951c8b795ffc0751cdee450;460;0d7f35b92071fc21458352ab08d55de5746531f9450;460;fe332a72b1b6977a1e793512705a1d337811f0c7450;460;d0002352e5af17f6e01cfc5b63b0b085d8a9e723450;460;9cbd98aa6de746078e88d5e1f5710e9869c4f0bc

आईने के सामने (काव्य संग्रह) का विमोचन 2014

400;300;f7d05233306fc9ec810110bfd384a56e64403d8f400;300;7a24b22749de7da3bb9e595a1e17db4b356a99cc400;300;648f666101a94dd4057f6b9c2cc541ed97332522400;300;bbefc5f3241c3f4c0d7a468c054be9bcc459e09d400;300;6b9380849fddc342a3b6be1fc75c7ea87e70ea9f400;300;7b8b984761538dd807ae811b0c61e7c43c22a972400;300;f4a4682e1e6fd79a0a4bdc32e1d04159aee78dc9400;300;611444ac8359695252891aff0a15880f30674cdc400;300;ba0700cddc4b8a14d184453c7732b73120a342c5400;300;02765181d08ca099f0a189308d9dd3245847f57b400;300;76eff75110dd63ce2d071018413764ac842f3c93400;300;e167fe8aece699e7f9bb586dc0d0cd5a2ab84bd9400;300;dc90fda853774a1078bdf9b9cc5acb3002b00b19400;300;f5c091ea51a300c0594499562b18105e6b737f54400;300;08d655d00a587a537d54bb0a9e2098d214f26bec400;300;52a31b38c18fc9c4867f72e99680cda0d3c90ba1400;300;40d26eaafe9937571f047278318f3d3abc98cce2400;300;0db3fec3b149a152235839f92ef26bcfdbb196b5400;300;497979c34e6e587ab99385ca9cf6cc311a53cc6e400;300;9180d9868e8d7a988e597dcbea11eec0abb2732c400;300;a5615f32ff9790f710137288b2ecfa58bb81b24d400;300;321ade6d671a1748ed90a839b2c62a0d5ad08de6400;300;133bb24e79b4b81eeb95f92bf6503e9b68480b88400;300;24c4d8558cd94d03734545f87d500c512f329073400;300;b6bcafa52974df5162d990b0e6640717e0790a1e400;300;aa17d6c24a648a9e67eb529ec2d6ab271861495b400;300;2d1ad46358ec851ac5c13263d45334f2c76923c0400;300;dde2b52176792910e721f57b8e591681b8dd101a400;300;e1f4d813d5b5b2b122c6c08783ca4b8b4a49a1e4400;300;b158a94d9e8f801bff569c4a7a1d3b3780508c31400;300;0fcac718c6f87a4300f9be0d65200aa3014f0598400;300;3c1b21d93f57e01da4b4020cf0c75b0814dcbc6d

हमसे संपर्क करें

visitor

682649

चिकोटी (ब्यंग्य संग्रह) का विमोचन 2012

400;300;6600ea27875c26a4e5a17b3943eefb92cabfdfc2400;300;acc334b58ce5ddbe27892e1ea5a56e2e1cf3fd7b400;300;639c67cfe256021f3b8ed1f1ce292980cd5c4dfb400;300;1c995df2006941885bfadf3498bb6672e5c16bbf400;300;f79fd0037dbf643e9418eb6109922fe322768647400;300;d94f122e139211ea9777f323929d9154ad48c8b1400;300;4020022abb2db86100d4eeadf90049249a81a2c0400;300;f9da0526e6526f55f6322b887a05734d74b18e66400;300;9af69a9bc5663ccf5665c289fc1f52ae6c1881f7400;300;e951b2db2cbcafdda64998d2d48d677073c32c28400;300;903118351f39b8f9b420f4e9efdba1cf211f99cf400;300;5c086d13c923ec8206b0950f70ab117fd631768d400;300;71dca355906561389c796eae4e8dd109c6c5df29400;300;b0db18a4f224095594a4d66be34aeaadfca9afb3400;300;dfec8cfba79fdc98dc30515e00493e623ab5ae6e400;300;31f9ea6b78bdf1642617fe95864526994533bbd2400;300;55289cdf9d7779f36c0e87492c4e0747c66f83f0400;300;d2e4b73d6d65367f0b0c76ca40b4bb7d2134c567

अन्यत्र

आदरणीय  कुशवाहा जी प्रणाम। कमेन्ट के लिए धन्यवाद ।
मनोज जी, अत्यंत सुंदर व्यंग्य रचना। शायद सत्ताधारियों के लिए भी जनता अब केवल हंसी-मजाक विषय रह गई है. जब चाहो उसका मजाक उड़ाओ और उसी के नाम पर खाओ&...
कुछ न कुछ तो कहना ही पड़ेगा , जानी साहब. कब तक बहरे बन कर बैठे रहेंगे. कब तक अपने जज्बातों को मरते हुए देखेंगे. आखिर कब तक. देश के हालात को व्यक्त क...
स्नेही जानी जी , सादर ,बहुत सुन्दर भाव से पूर्ण कविता ,आज की सच्चाई को निरुपित करती हुई . सफल प्रस्तुति हेतु बधाई .
तरस रहे हैं जो खुद, मय के एक कतरे को, एसे शाकी हमें, आखिर शराब क्या देंगे? श्री मनोज कुमार जी , नमस्कार ! क्या बात है ! आपने आदरणीय डॉ . बाली से...